मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जब इंसान किसी के साथ रहता है, तब हमें उसके गुण कम और कमियाँ ज्यादा दिखाई दे रही होती हैं । यह इंसानी फितरत है । हम यह सोच कर दुखी हो रहे होते है हमें इसे हमेशा सहन करना पड़ेगा । उससे पीछा छुड़ाने के बारे में सोचने लगते हैं । इसलिए उसकी खसियतों को देखने की जगह कमियाँ देख रहे होते हैं । जब वह इंसान चला जाता है उसके आने की उम्मीद नहीं रहती है । तब उसके द्वारा होने वाले काम याद आते है, उसकी कमी महसूस होने लगती है । किसी चीज की कमी उसकी कीमत बढ़ा देती है । जीवन में अमूल्य कही जाने वाली चीजों की अहमियत भी इसलिए होती है क्योंकि उसे आसानी से पाना मुश्किल होता है ।
इंसान की फितरत है कि वो किसी भी चीज की दो बार कद्र करता है। एक बार मिलने से पहले और दूसरा खो देने के बाद। हमेशा से ही यह होता चला आया है। दुनिया में हकीकत जानी तो जाती है मगर मानी नहीं जाती और यह भी सर्व विदित है कि समय, व्यक्ति और सम्बंध खो देने बाद ही उनके क़ीमती होने का एहसास होता है । कहते हैं:- कोई भूला है अपने घर का पता तो कोई अपनों को ही भूल बैठा है, ऐ जिंदगी तू भी कमाल है, कोई सो रहा है सड़कों पे, तो कोई मखमल पे जगा बैठा है । बाकी:- लोगों के पास हर समस्या का समाधान होता है, बस!! समस्या दूसरों की होनी चाहिए।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

