मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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पैसे की चाहत जहां लोगों को स्वार्थी बनाता है, वहीं पैसा हमारे जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक भी है। पैसे से हम भोजन, कपड़े, आश्रय, शिक्षा, चिकित्सा देखभाल और अन्य बुनियादी जरूरतों को खरीद सकते हैं। पैसा हमें अपने और अपने परिवार के लिए एक सुरक्षित और आरामदायक जीवन जीने की अनुमति देता है। जब किसी व्यक्ति के पास पैसा होता है, तो उसके दोस्त, प्यार और रिश्तेदार भी उसके आसपास होते हैं। इसका मतलब यह है कि पैसा सामाजिक संबंधों को प्रभावित करता है।
यह भी सच है कि पैसे से रिश्ते बनते भी हैं और बिगड़ते भी हैं। जब किसी के पास पैसा होता है, तो उसके दोस्त, प्यार और रिश्तेदार भी उसके पास आते हैं, लेकिन यह हमेशा सच नहीं होता कि पैसा ही सब कुछ है। रिश्तों की नींव प्यार, सम्मान और भरोसे पर टिकी होती है, जो पैसे से नहीं खरीदे जा सकते।अक्सर, पैसे की चाहत लोगों को स्वार्थी बना देती है और स्वार्थ भी अक्सर पैसे की लालसा से जुड़ा होता है। पैसे का अत्यधिक महत्व, लालच और स्वार्थ के कारण, लोगों के बीच संबंध खराब हो सकते हैं और सामाजिक ताना-बाना भी बिगड़ सकता है। पैसा जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू अवश्य है, लेकिन यह खुशी और संतुष्टि का एकमात्र स्रोत नहीं है।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

