मूकनायक राजस्थान अजमेर हेमन्त कुमार जाटवा सराना
राजस्थान की भाजपा सरकार ने अपने लाड़ले पूँजीपतियों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए दलितों और आदिवासियों की ज़मीन छीनने का फ़ैसला करके अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के साथ विश्वासघात कर दिया है.
मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के मंत्रीमंडल ने निर्णय लिया है कि अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों की ज़मीन अब सोलर कम्पनियों को लीज़ पर ले सकेगी,इसके लिए राजस्थान काश्तकारी अधिनियम-1955 की धारा 42 में संशोधन किया जाएगा.
सरकार यह सब इसलिये कर रही है ताकि पूँजीपतियों,सेठों और ज़मीन के दलालों को दलित आदिवासियों की ज़मीन लेने में कोई क़ानूनी अड़चन नहीं आये,अब तक तक तो क़ानून अजा जजा वर्ग की ज़मीन दान,लीज़,गिरवी तथा ख़रीदने बेचने पर रोक लगी हुई थी,जिसके चलते इन वर्गों के पास ज़मीन बची हुई थी.उनके जल,जंगल,ज़मीन सुरक्षित थे,उनका एक ठोर ठिकाना था,लेकिन अब राज्य की भाजपा सरकार दलित आदिवासियों को भूमिहीन करना चाहती है और इसके लिए क़ानून में बदलाव कर रही है.
भूमाफ़ियाओं को लाभ पहुँचाने के इस षड्यंत्र के पक्ष में तर्क यह दिया जा रहा है कि अक्षय ऊर्जा प्रॉजेक्ट के तहत सोलर पैनल हेतु एससी एसटी के लोग अपनी ज़मीन सोलर कम्पनियों को लीज़ पर नहीं दे पा रहे हैं,इससे उनको नुक़सान हो रहा है,उनको फ़ायदा मिले इस लिए कृषि भूमि की क़िस्म परिवर्तन की मंज़ूरी हेतु यह बदलाव किया जा रहा है.
ज़रा सोचिये, अगर दलित व आदिवासी की ज़मीन कोई अन्य जबरन भी क़ब्ज़ा ले या ब्याज के बदले ऐसे ही रख लें तो भी वह उससे मुक्त नहीं करवा पाता है,इन कम्पनियों से लीज़ मुक्ति करवा कर कभी वापस अपनी ज़मीन ले पायेगा,कभी नहीं,यह ज़मीने एक बार कम्पनियों के चंगुल में फँसी तो पीढ़ियों तक वापस नहीं मिलने वाली है,आज सोलर कम्पनियाँ,कल होटल वाली कम्पनियाँ,परसों गृह निर्माण कम्पनियाँ,फिर हर कोई फ़र्ज़ी कम्पनियाँ बना कर दलित आदिवासियों की ज़मीन हड़पो अभियान में शामिल हो जायेगा,इन भू-लुटेरों से हम अपनी ज़मीन कैसे बचा पाएँगे.
यह आदिवासी समुदाय द्वारा अरावली पर्वत शृंखला के भीतर संरक्षित भू सम्पदा को लूटने का कार्यक्रम है,यह आपके रेत के धोरों,चम्बल की सिंचित उपजाऊ कृषि भूमि और शहरों,क़स्बों,गाँवों में आपके पुरखों द्वारा ख़ून पसीना बहा कर शस्य श्यामला बनाई गई भूमि को लूटने का क़ानूनी रास्ता बनाया जा रहा है.
साथियों,सदियों बाद हमारे लोगों को थोड़ी बहुत ज़मीने मिली है,वह भी महज़ दो पीढ़ी बाद वापस छीनने की साज़िश हो गई हैं.
कितनी बेशर्मी से इस भूमि हड़पो योजना को अंजाम दिया जा रहा है,जैसे लगे कि हमारा भला किया जा रहा है.
इस षड्यंत्र को विफल करना है तो घर में ख़ामोश मत बैठिये,वर्ना अपने देखते देखते अपने पाँवों तले की ज़मीन खिसक जाएगी,जिन ज़मीनों के आज हम मालिक है,वहाँ हमें मज़दूरी भी नहीं मिलेगी,अपनी भूमि की रक्षा और आने वाली नस्लों के पाँव रखने के लिए इस देश प्रदेश में कोई ज़मीन का टुकड़ा अपने पास बचाये रखने के लिए राजस्थान सरकार के इस दलित आदिवासी विरोधी कैबिनेट डिसीजन का पुरज़ोर विरोध कीजिए.
पूरी क्षमता से कीजिए और तब तक कीजिए,जब तक कि यह पूँजीपतियों की सरकार बैकफुट पर आ कर माफ़ी माँग कर फ़ैसला न बदल दें,सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक अपने हक़ अधिकारों की हिफ़ाज़त की आवाज़ बुलंद कीजिए,आज अगर ख़ामोश रहे तो कल सन्नाटा छायेगा.
बोलिए,हर तहसील मुख्यालय पर ज्ञापन दीजिए और भी जिस तरह भी बन पड़े,विरोध दर्ज करवाइये,तभी बचेगी ज़मीन,नहीं तो हम दर दर भटकने को मजबूर होंगे,आने वाली नस्लें हमें कभी माफ़ नहीं कर पायेगी

