Thursday, February 26, 2026
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देने वाले समाज में “लाल” पैदा होते हैं और भीख मांगने वाले समाज में “दलाल” पैदा होते हैं

मूकनायक

देश

“राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा”

बहुजनों के मसीहा, बहुजन नायक, क्रांतिकारी महान तपॅस्वी, महान त्यागी, बहुजनों के मार्ग दर्शक और वैज्ञानिक से बने समाजिक वैज्ञानी मान्यवर साहेब श्री कांशीराम जी के त्याग और संघर्ष भरे जीवन की दास्तान हम आपके साथ सांझा करते हैं।

मान्यवर के मुताबिक हमारे पास इतने पैसे नहीं है कि हम किसी का वोट खरीद सके, लेकिन इतने वोट तो जरूर है कि मूवमेंट चलाने के लिए हम हमारे वोटरों से आर्थिक सहयोग (पैसा) ले सके।

हमारी लड़ाई ही नोटों वालों से है। वोट वाला समाज ही नोट वाले समाज को हराकर समतामूलक नोट वाला समाज बना सकता है।
हमें बिकाऊ समाज नहीं, टिकाऊ समाज बनाना है। जिस समाज का नेता बिकाऊ होता है, वह समाज कभी टिकाऊ नहीं बन सकता। जिस समाज का नेतृत्व टिकाऊ होता है, वह समाज कभी बिकाऊ नहीं बनता। हमें दलाल नहीं, बल्कि लाल पैदा करना है, क्योंकि देने वाले समाज में ‘लाल’ पैदा होते है, और माँगने वाले समाज में ‘दलाल’ पैदा होते है। इसलिए मैं अपने समाज को देनेवाला समाज बनाना चाहता हूँ, माँगने वाला समाज नहीं।

आर पीआई के मुकाबले मुझे बहुजन समाज पार्टी इसलिए खड़ी करनी पड़ी, ताकि कहीं बहुजन समाज कांग्रेस का पिछलग्गू न बन के रह जाए- साहेब कांशी राम।
जुॅग पलटाऊ बहुजन महानायक

प्रस्तुत करते है।
इंजीनियर तेजपाल सिंह
94177-94756

पुस्तक मैं कांशीराम बोलता हूं।
पम्मी लालो मजारा (बंगा नवांशहर)।
95011-43755

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