Thursday, February 26, 2026
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सम्मान पाने की लालसा रखने वाले नहीं, बल्कि सम्मान देने वाले बनने की रखें भावना

मूकनायक
देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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सहजता ही समर्थता है, सहनशीलता ही मानव जीवन की सबसे बड़ी सामर्थ्य है। सामर्थ्य का अर्थ यह नहीं कि आप दूसरों को कितना झुका सकते हो अपितु यह है कि आप स्वयं कितना झुक सकते हो क्योंकि जहाँ समर्थता होती है, वहाँ प्रायः विनम्रता का अभाव ही देखा जाता है। सामर्थ्य आते ही व्यक्ति के भीतर सम्मान प्राप्ति का भाव भी जागृत हो जाता है।
इसलिए सदैव इस बात के लिए प्रयासरत रहें कि हम सम्मान पाने की लालसा रखने वाले नहीं, सम्मान देने वाले बनने की भावना रखें । बाकी:- काम होने के बाद सम्मान तो दूर की बात है, स्वार्थ के वशीभूत वर्तमान में लोग काम सिद्ध कराने वाले व्यक्ति को ही भूल जाते हैं।
लेखक:
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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