जगला और तबलुटोला पहुंचे श्रमजीवी पत्रकार संघ के साथी, राहत सामग्री व दवाइयां बांटीं; सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के सवालों को शासन तक पहुंचाने का संकल्प
मूकनायक समाचार —/ सत्यशील गोंडाने / बालाघाट (मध्यप्रदेश)
बालाघाट। जिले के बैगा अंचल में बच्चों की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रोगग्रस्त ग्राम जगला में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दौरे के बाद यह मामला प्रदेश की सियासत में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे समय में मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ ने सामाजिक सरोकार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जगला सहित छह बैगा बाहुल्य गांवों को गोद लेने का निर्णय लिया है।
संघ के जिलाध्यक्ष इंद्रजीत भोज के नेतृत्व में पत्रकारों का दल बैगा अंचल के जगला और तबलुटोला पहुंचा। यहां ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया गया। पत्रकार साथियों ने ग्रामीण परिवारों को खाद्य सामग्री, साड़ियां, दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं तथा प्राथमिक उपचार की दवाइयां वितरित कीं। राहत सामग्री मिलने के साथ ग्रामीणों ने भी अपने गांव की जमीनी परिस्थितियों और लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को पत्रकारों के सामने रखा।
राहत से आगे बढ़कर समस्याओं की लड़ाई का संकल्प
मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल राहत सामग्री बांटने तक सीमित नहीं रहेगी। संघ द्वारा जगला, तबलुटोला, कोरका, बोंदारी, अडोरी और कुंडेकसा को गोद लेकर इन गांवों की समस्याओं को सामने लाने तथा शासन-प्रशासन तक पहुंचाने की दिशा में काम करने की बात कही गई है।
ग्रामीणों से संवाद के दौरान सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, राशन और रोजगार से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से सामने आए। ग्रामीणों का कहना रहा कि दूरस्थ बैगा क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता आज भी चुनौती बनी हुई है। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और समय पर उपचार नहीं मिलने जैसी परिस्थितियां ग्रामीण परिवारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
पत्रकार संघ की इस पहल को महज सहायता वितरण के बजाय ग्रामीण समस्याओं को समझने और उन्हें सार्वजनिक मंच तक पहुंचाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। संघ ने संकेत दिया कि गांवों में पहुंचकर जमीनी स्थिति की जानकारी जुटाई जाएगी और सामने आने वाली समस्याओं को संबंधित विभागों एवं प्रशासन के समक्ष रखा जाएगा।
बच्चों की मौत के कारणों की जांच की मांग
बैगा अंचल में बच्चों की मौत का मामला सबसे गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। लगातार सामने आ रही मौतों के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था, पोषण, उपचार की उपलब्धता और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
संघ जिलाध्यक्ष इंद्रजीत भोज ने बैगा अंचल में बच्चों की मौत के वास्तविक कारणों की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौतों के कारणों की निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन परिस्थितियों में बच्चों की जान गई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
उन्होंने प्रभावित परिवारों को नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है। साथ ही बैगा अंचल में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और खाद्यान्न जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
ग्रामीणों की आवाज बनेगा पत्रकार संघ
संघ का कहना है कि पत्रकारिता केवल घटनाओं की खबर प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के उन वर्गों की आवाज को सामने लाना भी उसका दायित्व है, जिनकी समस्याएं अक्सर दूरस्थ क्षेत्रों तक सीमित रह जाती हैं। बैगा अंचल के छह गांवों को गोद लेने की पहल इसी सामाजिक जिम्मेदारी की दिशा में उठाया गया कदम है।
जगला और तबलुटोला में ग्रामीणों से हुए संवाद के बाद संघ ने यह भरोसा दिलाया कि गांवों की समस्याओं को लगातार उठाया जाएगा। सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं से लेकर शिक्षा, राशन और रोजगार तक के मुद्दों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
बैगा अंचल में बच्चों की मौतों का मुद्दा पहले ही प्रदेश स्तर पर गंभीर राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुका है। ऐसे में पत्रकार संगठन द्वारा ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझना और छह गांवों को गोद लेने का निर्णय प्रशासन के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है कि दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों की समस्याओं को केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर समझने और समाधान करने की आवश्यकता है।
अब देखना होगा कि पत्रकार संघ की यह पहल इन छह बैगा बाहुल्य गांवों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति सुधारने और बच्चों की मौतों के कारणों की वास्तविकता सामने लाने में कितनी प्रभावी साबित होती है।

