महाबोधि महाविहार बौद्धों को सौंपने की मांग को लेकर बिलासपुर में धरना प्रदर्शन, राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन
बिलासपुर।
माता सावित्री बाई के स्मृति दिवस के अवसर पर 10 मार्च 2026 को डॉ. आंबेडकर प्रतिमा स्थल, जीडीसी कॉलेज के पास बिलासपुर में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन ऑल इंडिया बुद्धिस्ट फोरम बिलासपुर के नेतृत्व में भारतीय बौद्ध महासभा, डॉ. आंबेडकर युवा मंच, महिला सशक्तिकरण संघ, भारतीय बौद्ध महासभा महिला विंग, पंचशील नगर तिफरा बौद्ध समाज, बुद्धयान सोसायटी, भारतीय बौद्ध महासभा धमनी चकरभाठ सहित नगर के विभिन्न बौद्ध विहार समितियों—नागार्जुन बौद्ध विहार, पंचशील बौद्ध विहार, करूणा बौद्ध विहार तथा आनंद बौद्ध विहार—के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बौद्ध समाज के संरक्षक एवं भारतीय बौद्ध महासभा के प्रांतीय सलाहकार महेश चंद्रिकापुरे तथा बौद्ध समाज के अध्यक्ष व भारतीय बौद्ध महासभा के राष्ट्रीय सदस्य सारंग राव हुमने रहे। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर और तथागत भगवान गौतम बुद्ध के तैल चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ सामूहिक बुद्ध वंदना से हुई।
धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता करते हुए भारतीय बौद्ध महासभा बिलासपुर के जिला अध्यक्ष राजेश हुमने ने कहा कि बोधगया वह ऐतिहासिक स्थल है जहाँ तथागत भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। यह स्थल विश्व भर के बौद्धों की आस्था का केंद्र है, इसलिए महाबोधि महाविहार का प्रबंधन पूर्णतः बौद्ध समाज के हाथों में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति अधिनियम 1949 के तहत गठित समिति में गैर-बौद्ध सदस्यों की भागीदारी बौद्ध समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत करती है।
वक्ताओं ने कहा कि प्रतिवर्ष दुनिया भर से लाखों बौद्ध श्रद्धालु बोधगया आते हैं, लेकिन मंदिर परिसर में गैर-बौद्ध गतिविधियों और पुजारियों की उपस्थिति से बौद्ध मतावलंबियों को गहरी धार्मिक पीड़ा और असहजता महसूस होती है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की छवि प्रभावित होती है। उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 तथा अनुच्छेद 26 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक धर्म के अनुयायियों को अपने धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन का अधिकार है, इसलिए महाबोधि महाविहार का प्रबंधन भी बौद्धों को सौंपा जाना चाहिए।
बौद्ध समाज के संरक्षक महेश चंद्रिकापुरे ने कहा कि जैसे मंदिरों में पंडित, चर्च में पादरी और मस्जिदों में मौलाना पूजा-पाठ करते हैं, उसी प्रकार महाबोधि महाविहार में पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों का अधिकार बौद्ध समाज को मिलना चाहिए। यह केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि धार्मिक सम्मान और आस्था का प्रश्न है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित संगठनों द्वारा एक स्वर में मांग की गई कि बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति अधिनियम 1949 को निरस्त कर महाबोधि महाविहार का पूर्ण प्रबंधन बौद्ध समाज को सौंपा जाए।
धरना प्रदर्शन के बाद दोपहर लगभग 4 बजे प्रतिनिधिमंडल ने बिलासपुर कलेक्टर कार्यालय पहुँचकर महामहिम राष्ट्रपति एवं माननीय प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में राजेश हुमने (जिला अध्यक्ष, भारतीय बौद्ध महासभा बिलासपुर), महेश चंद्रिकापुरे (प्रांतीय सलाहकार), सारंग राव हुमने (राष्ट्रीय सदस्य), वरिष्ठ पत्रकार कमलेश लाहोतरे, कुणाल रामटेके, सुजाता वाहने तथा चेतना तम्हाने प्रमुख रूप से शामिल रहे।
कार्यक्रम को सारंग राव हुमने, नरेंद्र रामटेके, कमलेश लाहोतरे, कुणाल रामटेके, लोकेश पूजा बौद्ध, अनीता लाहोतरे, वंदना भांगे और अनामिका पाटिल सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।
ऑल इंडिया बुद्धिस्ट फोरम बिलासपुर की अध्यक्ष सुजाता वाहने ने कार्यक्रम का संचालन किया तथा फोरम की ओर से चेतना तम्हाने ने आंबेडकरी विचारधारा से जुड़े बिलासपुर के सभी संगठनों, बौद्ध विहार समितियों और उपस्थित उपासकों-उपासिकाओं का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में रूपा मेश्राम, सीमा मेश्राम, उषा वाहने, लीला रामटेके, सपना गजभिये, विमल रंगारी, चंदानंदा गौरी, गोपाल पात्रे, अरविंद वाघमारे, सुचिता वाघमारे, सुखनंदन मेश्राम, रश्मि खोबरागड़े, नीलिमा मोटघरे, गीता ऊके, उज्जवला रंगारी, लक्ष्मी वैध, प्रतिमा सहारे, अनीता मेश्राम, ललिता वाहने, प्रकृति बौद्ध, सरला रामटेके, नीता हुमने, नारायण हुमने, मगन गेडाम, अरुणा नागवंशी, वीरेंद्र नागवंशी, राजेंद्र गणवीर, दिलीप मेश्राम, बसंत तुल, प्रमोद बेले, पीलेन्द्र वाहने सहित बड़ी संख्या में बौद्ध समाज के उपासक-उपासिकाएं उपस्थित रहे।





