Thursday, February 26, 2026
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अपराधिक व हिंसक दृश्यों को देखने, इर्द-गिर्द के वातावरण और मानवीय व्यवहारों में होने वाले परिवर्तनों से बच्चों में पनपतीं है क्रोध व हिंसक की प्रवृत्ति

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अक्सर जब बच्चों को विडियो गेम खेलने या टीवी देखने से रोका जाता है तो वे अपनी भावनाओं पर नियंत्रण खोकर हिंसक हो जाते हैं क्योंकि वर्तमान में आपराधिक दृश्यों को अधिक देखने के कारण बच्चों में धैर्य रखने की क्षमता तेजी से घट रही है। इसके परिणामस्वरूप बच्चे अत्यधिक चिड़चिड़े और क्रोधित होते जा रहे हैं। बच्चों में हिंसा की भावना हिंसक दृश्यों को देखने से ही नहीं, बल्कि ईर्द गिर्द के वातावरण व मानवीय व्यवहारों में होने वाले परिवर्तनों को जब उनका मस्तिष्क स्वीकार नहीं कर पाता, तब भी उनमें हिंसक प्रवृत्ति पनपती है । बच्चों में चिड़चिड़ापन व गुस्सा आमतौर पर हताशा या परेशानी का संकेत होता है, जो चिंता या सीखने संबंधी विकारों सहित कई अंतर्निहित मुद्दों के कारण हो सकता है। बच्चे के गुस्से को कम करने का पहला कदम उसके स्रोत की पहचान करना है।
कई माता-पिता यह नहीं जानते कि जब उनके बच्चे गुस्से में हों या उनका गुस्सा फूट रहा हो, तो उन्हें कैसे मदद करनी चाहिए। बच्चों को उनके गुस्से को रोकने के लिए वह देना आम बात है जो वे चाहते हैं, जैसे कि उन्हें रोना बंद करने के लिए कोई खिलौना देना, लेकिन यह प्रतिक्रिया बच्चे को सिखाती है कि वे रोने से खिलौने पा सकते हैं । इसलिए उनके अधिक गुस्से में आने की संभावना अधिक होती है। इसके बजाय, उन ट्रिगर्स को देखना मददगार होता है, जो आपके बच्चे को ऐसा करने के लिए प्रेरित करते हैं और उन्हें अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के अधिक परिपक्व तरीकों की ओर ले जाते हैं । बहरहाल कारण कोई भी हो, माता-पिता और अभिभावकों का प्यार, उनकी निकटता और भावनात्मक सहयोग ही बच्चों के व्यवहार में बदलाव ला सकता है । सर्वेक्षणों में भी यह सिद्ध हो चुका है कि माता-पिता और अभिभावकों से दूरी भी बच्चों को खुंखार बनाती है । दुर्भाग्यवश आज की चकाचौंध दुनिया में माता-पिता और अभिभावकों के पास भी बच्चों को देने के लिए समय ही नहीं है।
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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