मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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वर्तमान समय को प्रगति का युग कहा जाता है। इन दिनों ज्ञान और विज्ञान का असाधारण विस्तार हुआ है। इसके साथ ही सुविधाजनक साधनों की भी अतिसय वृद्धि हुई है। आज के युग में विज्ञानिक उपकरणों का उपयोग इतना बढ़ गया है कि इन उपकरणों के बिना हमें अपने जीवन में कमी का एहसास होता है। विज्ञान की प्रगति के कारण ही आज हमारे पास आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं।
वहीं अतीत में इतने साधन नहीं थे, फिर भी लोग सुखपूर्वक रहते थे, लेकिन अब सुविधाओं का बाहुल्य होते हुए भी अधिकांशत: व्यक्ति मानसिक तनाव, दुखी, उदास, चिंतित और क्षुब्ध देखे जाते हैं। इसका कारण वस्तुओं की कमी नहीं, बल्कि जो कुछ उपलब्ध है, उसका सदुपयोग नहीं हो पाना है। बुद्धिमत्ता का वास्तविक स्वरूप यही है कि जो कुछ हस्तगत है, उसका श्रेष्ठतम सदुपयोग किया जाय। बाकी:- कोई नहीं किसी का, यहाँ सबको अपने अपने फायदे की लगी बीमारी है, स्वार्थ से चल रही ये दुनियां, सब मतलब की रिश्तेदारी हैं…
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

