मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जो इंसान गलत होता हैं, उसकी आवाज ऊँची होती हैं, और जो सही इंसान होता हैं, उसका व्यक्तित्व ऊँचा होता है। बलशाली होकर भी क्षमा करने वाला और ग़रीब होकर भी दान करने वाला हमेशा आदरणीय होता है। इसलिए सराहना दिल से, हस्तक्षेप दिमाग से, और समीक्षा विवेक से करने में ही समझदारी है । अन्यथा मौन ही उत्तम है क्योंकि सत्य की अपनी एक शांत गरिमा होती है। महान दार्शनिकों ने भी कहा है कि यदि आपकी बात में वजन है, तो उसे धीरे बोलने पर भी सुना जाएगा। शोर केवल कानों तक पहुँचता है, जबकि ठोस तर्क सीधा दिल और दिमाग पर प्रहार करते हैं।
शोर हमेशा कमजोरी का संकेत है, जबकि मौन और ठोस तर्क शक्ति का प्रतीक हैं। समाज में जब लोग सच्चाई से भागते हैं, तो वे अपनी बात मनवाने के लिए चिल्लाने लगते हैं। हमें शोर के पीछे के तर्कों को पहचानने की आवश्यकता है और शोर को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। समझदार लोग शोर में नहीं, बल्कि तथ्यों और तर्कों में सच्चाई ढूंढते हैं। बाकी -: दहाड़ने वाला अगर शांत हो जाये तो उसकी खामोशी सुकून नहीं खौफ पैदा करती है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

