मूकनायक न्यूज/सिरोही/राजस्थान
सिरोही: आजादी के 78 वर्ष बाद भी ओबीसी, एससी-एसटी समाज को बार-बार धोखा दिया जा रहा है। यह आरोप लगाते हुए सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र, और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने आज भारी धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ चार बड़े मुद्दों पर सख्त नारेबाजी की और मांग की कि 2027 की जनगणना में ओबीसी और उनकी जाती का अलग कॉलम जोड़ा जाए, यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन एक्ट को सख्त बनाया जाए, पुराने शिक्षकों को टेट से मुक्त किया जाए तथा चुनाव में ईवीएम की जगह बैलट पेपर या 100 प्रतिशत वीवीपीएटी से निकलने वाली पर्चियों की गिनती अनिवार्य की जाए।प्रदर्शन स्थल पर लगे बैनरों पर लिखा था – “ओबीसी की गिनती नहीं तो प्रतिनिधित्व नहीं”, “जातिगत भेदभाव बंद करो, और “ईवीएम छोड़ो, लोकतंत्र बचाओ”। धरना सुबह 11 बजे शुरू हुआ और शाम तक चला। राष्ट्रीय मूलनिवासी महिला संघ और भारतीय विद्यार्थी मोर्चा के युवा प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।
2027 जनगणना में ओबीसी को फिर धोखा दिया गया है, उनकी गिनती की जाए: प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 30 अप्रैल 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2027 की जनगणना में जाति आधारित गणना को मंजूरी दे दी थी। लेकिन 22 जनवरी 2026 को जारी अधिसूचना में ओबीसी की जाति का अलग कॉलम ही नहीं दिया गया। “यह आजादी के बाद 78 सालो से लगातार धोखा है,” राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट दशरथ सिंह आढा ने कहा। “जब तक ओबीसी की सही गिनती नहीं होगी, तो शासन-प्रशासन, शिक्षा और रोजगार में उनका प्रतिनिधित्व कैसे सुनिश्चित होगा? यह संविधान के अनुच्छेद 340 और अनुच्छेद 15(4) को जानबूझकर प्रभावहीन बनाने की साजिश है। इससे लोकतंत्र खतरे में पड़ गया है।
जातिगत भेदभाव पर सख्त यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन एक्ट लागु किया जाए: यूजीसी ने खुद सुप्रीम कोर्ट में जो आंकड़े पेश किए हैं, उनके अनुसार पिछले 5 वर्षों में उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव में 118 प्रतिशत की भयानक वृद्धि हुई है। इस वजह से रोहित वेमुला, पायल तडवी जैसे सैकड़ों होनहार छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या कर ली। प्रदर्शनकारियों ने कहा, “सरकार ने पहले कमजोर एक्ट लाया और फिर कोर्ट में भी कमजोर पैरवी की। अब तक मामला लटका पड़ा है। हम ओबीसी, एससी, एसटी के समर्थन में सख्त यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन एक्ट को तुरंत लागू करने की मांग करते हैं।
2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टेट से मुक्ति दी जाए: तीसरा बड़ा मुद्दा शिक्षकों का था। प्रदर्शन में शामिल राष्ट्रीय मूलनिवासी बहुजन कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष छगन लाल कुंडला ने बताया कि 2011 से पहले सरकार ने जो योग्यता तय की थी, उसी के आधार पर उनकी नियुक्ति हुई थी। अब 20-30 साल की सेवा के बाद अचानक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य कर दी गई है। “यह उनके और उनके परिवार के साथ खुला धोखा है। इससे उनका पूरा करियर बर्बाद हो जाएगा। हम मांग करते हैं कि 2011 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टेट से पूर्ण मुक्ति दी जाए,”
ईवीएम पर पूर्ण अविश्वास: बहुजन क्रान्ति मोर्चा के जिला संयोजक एडवोकेट सुंदर लाल मोसलपुरिया ने कहा “ईवीएम छोड़ो, बैलट लाओ!” उन्होंने आगे ने कहा कि या तो पूरी तरह बैलट पेपर से चुनाव कराए जाएं या फिर ईवीएम से निकलने वाली 100 प्रतिशत वीवीपीएटी पर्चियों की गिनती अनिवार्य की जाए। “मशीन से छेड़छाड़ की आशंका बनी हुई है। लोकतंत्र की रक्षा के लिए यह सबसे जरूरी मांग है,” **सरकार पर सवाल, आंदोलन की चेतावनी** भारत मुक्ति मोर्चा के भवानी शंकर गर्ग ने स्पष्ट चेतावनी दी कि– “अगर इन चार मुद्दों पर तुरंत संज्ञान नहीं लिया गया तो देशव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा। राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद के जिलाध्यक्ष मोहन लाल मीणा ने कहा कि ओबीसी, एससी, एसटी समाज अब चुप नहीं रहेगा। वे अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने को तैयार हैं। सरकार को अब इन मांगों पर तुरंत ध्यान देना होगा, वरना लोकतंत्र की जड़ें हिलने का खतरा और बढ़ जाएगा।प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। पुलिस ने भी कोई अप्रिय घटना होने नहीं दी। सामाजिक न्याय के पक्षधर कई संगठनों के पदाधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उनके मुद्दों का समर्थन किया। धरने मे निम्न लोगों की सहभागिता रही एडवोकेट सुंदरलाल मोसलपुरिया, एडवोकेट संजय माली, एडवोकेट दशरथसिंह आढा ,मिश्रीलाल चौहान, बाबूलाल मीणा, भवानी शंकर गर्ग, नैनाराम मेघवाल, मोहनलाल मीणा आदिवासी, गिरीश कुमार भील, मंछाराम परिहार, जोराराम आदिवासी , मांगीलाल ओडा, नारायण राणा, शंकरलाल देवासी।

