Sunday, March 15, 2026
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माता सावित्री बाई फुले की पुण्यतिथि पर शांतिपूर्ण धरना, Bodh Gaya Temple Act 1949 निरस्त करने की मांग

न्यूज़ छत्तीसगढ़

माता सावित्री बाई फुले की पुण्यतिथि पर शांतिपूर्ण धरना, Bodh Gaya Temple Act 1949 निरस्त करने की मांग

मूकनायक
कमलेश लवहात्रै छत्तीसगढ़ प्रभारी

गौदिया/ भंडारा

क्रांतिज्योति माता सावित्री बाई फुले की पुण्यतिथि (10 मार्च) के अवसर पर The Registered Buddhist Society of India (दि रजिस्टर्ड बुद्धिस्ट्स सोसायटी ऑफ इंडिया – भारतीय पंजीकृत बौद्ध समाज) महाराष्ट्र यूनिट की ओर से भण्डारा और गोंदिया जिलों में शांतिपूर्ण एक दिवसीय धरना आयोजित किया गया। इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारियों और बौद्ध समुदाय के प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर कार्यालय पहुँचकर भारत के राष्ट्रपति व बिहार सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि विश्व के बौद्धों की आस्था का केंद्र महाबोधि महाविहार का प्रबंधन पूर्ण रूप से बौद्धो को सौंपा जाए तथा Bodh Gaya Temple Act 1949 (BT ACT 1949) को पूर्ण रूप से निरस्त किया जाए।

संगठन के पदाधिकारी किशोर बौद्ध, राजकुमार बौद्ध, मनोज बौद्ध, मनोहर बौद्ध, डॉ हिरेन्द्र बौद्ध, वतन बौद्ध, अमर बौद्ध, दिलीप अर्थशी और राहुल बौद्ध चेतन बौद्ध, वासुदेव बौद्ध, धम्मपाल बौद्ध, राजकुमार बौद्ध, सुधीर बौध्द, समीर बौद्ध सहित अन्य साथियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुँचकर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रस्तुत किया। ज्ञापन में कहा गया कि तथागत बुद्ध को जिस पवित्र स्थल पर संबोधि प्राप्त हुई, वह महाबोधि महाविहार समस्त विश्व के बौद्धों के लिए अत्यंत श्रद्धा और आस्था का केंद्र है, बौद्धो का देवालय है, इसलिए उसका प्रबंधन स्वाभाविक रूप से भारत के कानूनी रूप से बौद्धो के हाथों में होना चाहिए।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि वर्तमान में लागू BT Act 1949 के कारण महाबोधि महाविहार के प्रबंधन में बौद्ध समुदाय की पूर्ण भागीदारी नहीं है, जो ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। इसी कारण देशभर में बौद्ध समुदाय लंबे समय से इस अधिनियम को निरस्त करने और महाविहार का संपूर्ण प्रबंधन बौद्धों को सौंपने की मांग कर रहा है।

संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह केवल किसी एक संगठन की मांग नहीं है, बल्कि भारत और विश्व भर के बौद्ध समुदाय की भावना और अधिकार का प्रश्न है। उन्होंने बताया कि इस विषय को लेकर देश के अनेक राज्यों में बौद्ध समुदाय शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहा है।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले ने अपने जीवन में शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष किया था। उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर ही बौद्ध आज शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक मार्ग से अपने अधिकारों की मांग कर रहा है।

कार्यक्रम में गोंदिया जिले से बाबूलाल बौद्ध, मुनेश्वर बौद्ध, रोहित बौद्ध, सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता और पंजीकृत बौद्ध समाज के सदस्य भी उपस्थित रहे और उन्होंने इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

अंत में संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि जब तक महाबोधि महाविहार को बौद्ध समाज को सौंपने और BT Act 1949 को निरस्त करने की मांग पूरी नहीं होती, तब तक यह आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी के विरुद्ध नहीं, बल्कि धम्म, न्याय और ऐतिहासिक सत्य की पुनर्स्थापना के लिए है, ताकि विश्व के बौद्धों की आस्था के केंद्र महाबोधि महाविहार का प्रबंधन उसी समुदाय को मिल सके जिसके लिए यह पवित्र स्थल सर्वोच्च महत्व रखता है।

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