महाबोधि महाविहार का पूर्ण प्रबंधन बौद्धों को सौंपने की मांग को लेकर देश में धरना प्रदर्शन, ज्ञापन 10 मार्च को , तुषार गायकवाड़ ने आयोजन को सफल बनाने की अपील
मूकनायक
कमलेश लवहात्रै छत्तीसगढ़ प्रभारी
बिलासपुर छत्तीसगढ़
महाबोधि महाविहार का पूर्ण प्रबंधन बौद्धों को सौंपने की मांग को लेकर देश में धरना प्रदर्शन, ज्ञापन का आयोजन10 मार्च को आयोजित है, मूकनायक के प्रधान संपादक तुषार गायकवाड़ ने आयोजन को सफल बनाने की अपील करते हुए कहा कि
विश्व विख्यात महाबोधि महाविहार के पूर्ण प्रबंधन को बौद्ध समुदाय को सौंपने तथा Bodh Gaya Temple Act, 1949 को निरस्त करने की मांग को लेकर देश और विदेश के बौद्ध अनुयायियों द्वारा चलाया जा रहा शांतिपूर्ण आंदोलन अब राष्ट्रीय स्वरूप ग्रहण कर चुका है। इसी क्रम में 10 मार्च को पूरे देश में एक दिवसी धरना प्रदर्शन कर महामहिम राष्ट्रपति महामाई में राज्यपाल को ज्ञापन कलेक्टर के माध्यम से दिया जाएगा।
गौरतलब है कि
विभिन्न बौद्ध संगठनों और अनुयायियों ने इस विषय में केंद्र एवं राज्य सरकार से त्वरित हस्तक्षेप कर ऐतिहासिक न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है।
बौद्ध समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि बिहार के गया जिले में स्थित महाबोधि महाविहार वह पवित्र स्थल है जहाँ गौतम बुद्ध को बोधि अर्थात ज्ञान प्राप्त हुआ था। यह स्थल केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व के करोड़ों बौद्धों की सर्वोच्च आस्थाका केंद्र है। इसकी वैश्विक महत्ता को देखते हुए UNESCO ने इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्रदान की है।
आंदोलन से जुड़े बौद्ध संगठनों का कहना है कि स्वतंत्रता के बाद लागू किए गए Bodh Gaya Temple Act, 1949 के तहत महाविहार के प्रबंधन के लिए जो समिति बनाई गई, उसमें बौद्ध समुदाय को पूर्ण प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं है। उनका आरोप है कि वर्तमान संरचना धार्मिक संतुलन और ऐतिहासिक वास्तविकता के अनुरूप नहीं है।
पिछले एक वर्ष से अधिक समय से बोधगया सहित देश के विभिन्न हिस्सों में बौद्ध अनुयायियों द्वारा शांतिपूर्ण धरना, जनजागरण अभियान, हस्ताक्षर अभियान और संवैधानिक तरीके से आंदोलन चलाया जा रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका संघर्ष पूरी तरह अहिंसक, विधि-सम्मत और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की भावना पर आधारित है।
बौद्ध समुदाय का यह भी कहना है कि महाबोधि महाविहार केवल स्थानीय प्रशासनिक विषय नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय आस्था से जुड़ा प्रश्न है। थाईलैंड, श्रीलंका, जापान, म्यांमार, वियतनाम, कोरिया और तिब्बत सहित अनेक देशों के बौद्ध अनुयायी इस स्थल को अपनी आध्यात्मिक विरासत मानते हैं।
आंदोलनकारियों ने सरकार के समक्ष निम्न प्रमुख मांगें रखी हैं—
Bodh Gaya Temple Act, 1949 को पूर्ण रूप से निरस्त किया जाए।
महाबोधि महाविहार का पूर्ण प्रबंधन, प्रशासन एवं निर्णयाधिकार बौद्ध समुदाय को सौंपा जाए।
नई प्रबंधन समिति पूर्णतः बौद्ध प्रतिनिधियों से गठित की जाए।
केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संयुक्त उच्चस्तरीय समीक्षा समिति का गठन किया जाए।
आंदोलनकारियों के साथ औपचारिक संवाद स्थापित किया जाए।
आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यह मांग किसी धर्म या समुदाय के विरोध में नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक न्याय, धार्मिक स्वायत्तता और संवैधानिक अधिकारों की पुनर्स्थापना से जुड़ी हुई है। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और कानून व्यवस्था तथा सामाजिक सद्भाव का पूर्ण पालन किया जाएगा।
मूकनायक के प्रधान संपादक व
बौद्ध संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह किया है कि इस संवेदनशील और ऐतिहासिक विषय पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर बौद्ध समुदाय की दीर्घकालिक मांग का सम्मान किया जाए।


