Saturday, March 14, 2026
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बोधगया महाबोधी महाविहार को गैर बौद्धों से निजात दिला कर रहेंगे,छत्तीसगढ़ बौद्ध समाज दृढ़ संकल्पित है….सविता बौद्ध

बोधगया महाबोधी महाविहार को गैर बौद्धों से निजात दिला कर रहेंगे,छत्तीसगढ़ बौद्ध समाज दृढ़ संकल्पित है….सविता बौद्ध

दुर्ग छत्तीसगढ़

मूकनायक
कमलेश लवहात्रै छत्तीसगढ़ प्रभारी

क्रांतिज्योति ज्ञानज्योति भारत की प्रथम शिक्षिका, प्रधान अध्यापिका सावित्रीबाई फूले स्मृति दिवस पर छत्तीसगढ़ के 7 जिलों के बौद्ध समाज ने बोधगया महाबोधी महाविहार मुक्ति के लिए एक ही तिथि को एक साथ अपने अपने जिलों में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। भारत के अनेक राज्यों में एक ही दिन पर शांति पूर्ण धरना प्रदर्शन करके ज्ञापन सौंपे गए है।ऑल इंडिया बुद्धिष्ट फोरम और समस्त बौद्ध संगठन बोधगया महाबोधी महाविहार से बीटीएमसी एक्ट 1949 खत्म करने और महाविहार को गैर बौद्धों से पूर्णतया निजात दिलाकर बौद्धों को सौंपने की अपनी दो मांगे लेकर 395 दिनों से लगातार शांति पूर्ण धरना प्रदर्शन कर संवैधानिक लड़ाई लड रहे है। क्या है बीटी एक्ट 1949 ? वास्तव में यह एक्ट संविधान लागू होने के पूर्व बनाया गया था जिसकी प्रबंधन कमेटी में चार बौद्ध और पांच गैर बौद्ध नियुक्त किए गए थे। चूंकि यह 1950 संविधान लागू होने के पूर्व का कानून था इसलिए यह संविधान के आर्टिकल 13 के अनुसार अपने आप ही शून्य घोषित हो जाता है। इसके बावजूद इस एक्ट के अनुसार बोधगया महाबोधी महाविहार का व्यवस्थापन और प्रबंधन चल रहा है। बौद्धों को यह अमान्य है । क्योंकि भारत में किसी धार्मिक स्थल पर ऐसी असंगत व्यवस्था नहीं है। मस्जिद कमेटी में मुस्लिम,मंदिर कमेटी में हिंदू,चर्च कमेटी में ईसाई,सिक्ख कमेटी में सिक्ख और जैन मंदिर कमेटी जैन सदस्यता ग्रहण करते है । महाबोधी महाविहार ही एक ऐसा बौद्ध स्थल है जहां आधे से कम बौद्ध और आधे से अधिक संख्या में गैर बौद्ध शामिल है । ज्ञान स्थली बोधगया में बुद्ध के सिद्धांतों के विपरीत अवांछनीय कर्मकांड,पाखंड किए जाते है। आज भी अनेक कठिनाइयों का सामना कर बौद्ध भिक्कू दृढ़ संकल्पित होकर जीवन की अंतिम सांस तक लड़ने का संकल्प लेकर धरने पर बैठे हुए है। छत्तीसगढ़ प्रदेश में दुर्ग के अलावा बिलासपुर,राज नंदगांव,रायपुर,कोरबा,डोंगरगढ़,आदि अनेक जिलों में कलेक्टर द्वारा माननीय प्रधानमंत्री,महामहिम राष्ट्रपति,मुख्यमंत्री बिहार राज्य,अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष दिल्ली,सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली,अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष छत्तीसगढ़ के नाम ज्ञापन सौंपा गया। बौद्ध समाज अपने हक की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में लड़ने के साथ साथ जमीन स्तर की लड़ाई भी लड़ रहा है और आगे भी यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक बौद्ध को न्याय नहीं मिलता। दुर्ग जिले के समस्त बौद्ध संगठनों की उपस्थिति में ऑल इंडिया बुद्धिष्ट फोरम की प्रदेश अध्यक्ष सविता बौद्ध ने कहा कि पांच साल का हमारा रोड़मैप तैयार है । इस माह से आगे आने वाले प्रत्येक महीने में एक दिवसीय शांति पूर्ण सांकेतिक धरना करते रहेंगे। ऑल इंडिया बुद्धिष्ट फोरम की कोषाध्यक्ष जयश्री बौद्ध, सलाहकार तथा समता सुरक्षा सेना के प्रमुख डॉ.अरविंद चौधरी,अनिल जोग,काशी मेश्राम,अजय शेंडे,सुदेश कुमार और अशोक मेश्राम ने विशेष भूमिका निभाते हुए धरने की पूर्ण व्यवस्था संभाली । जन संघर्ष मोर्चा के कलादास डहरिया, बौद्ध संगठन प्रमुख में सेवानिवृत संजय शेंद्र, द्वारका प्रसाद अहिरवार , अल्का बौद्ध ,द्वारका प्रसाद भोईर, पूर्णिमा ऊके ,करुणा बौद्ध,वंदना बौद्ध,खुशबू बौद्ध,लतिका खांडेकर, सुरेन्द्र पटले,वर्षा बागड़े, सविता मेश्राम,रविन्द्र लता गाडगे, भाउदास जम्बूलकर, एस आर कांडे,प्रज्ञा कांडे,आनंद रामटेके,संतोष नंदा,अशोक मडामे,योगेन्द्र चौरे,मंगला गेडाम ,महेंद्र चौहान,अजीत वैद्य,शैलेन्द्र चाहंदे,महेंद्र बौद्ध, भी आर कटाने , इंदु रामाराव ढोक,धीरेन्द्र धोटे ,अष्टशिला,कविता रंगारी, ज्ञानेश्वर बागड़े,अर्चना वासनिक,पूनम शेंडे,नारद गोंडाने,दिलीप रामटेके,ओमप्रकाश गजभिए ,सुरेन्द्र वैद्य अशोक श्यामकुवर , मनोज मेश्राम, शिवचरण पानतवने, विनोद टेभरें एच पी नंदागवली, वंदना बौद्ध, सुजाता रामटेके, गौतम खोबरागड़े, महेंद्र वाघमारे, प्रवीण वासनिक, भूपत बोरकर,हेमराज मेश्राम, युवराज बंसोड,अनिता कराड़े, उषा मेश्राम, शारदा मेश्राम, सुजाता चौहान, के के चौहान, जीवन सुर्यवंशी,ने दो सौ से ऊपर गरिमामई उपस्थिति दर्ज कर धरना प्रदर्शन किया।

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