
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के सेंटर फॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम्स (आईकेएस सेल) द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय था — “द इंटेलेक्चुअल लेगेसी ऑफ वूमेन इन भारतीय ज्ञान परंपरा विथ स्पेशल रेफरेंस टू एंशिएंट इंडिया (प्री-कोलोनियल पीरियड)”। समारोह में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा में महिलाओं की बौद्धिक एवं सामाजिक भूमिका पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा उपस्थित रहीं। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर संस्थान की प्राइम मिनिस्टर प्रोफेसर डॉ. अर्चना शर्मा, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर एवं डीन (अकादमिक) डॉ. शुभ्रता गुप्ता तथा श्रीमती ज्योति रमना राव सम्माननीय वक्ताओं के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में डॉ. तोषण मीनपाल, डॉ. मधुकृष्णा प्रियदर्शिनी, डॉ. मीना मुर्मू सहित संकाय सदस्य, कर्मचारी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। प्रारंभिक वक्तव्य में डॉ. मधुकृष्णा प्रियदर्शिनी ने विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाएं राष्ट्र निर्माण में समान भागीदारी निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि जब एक महिला शिक्षित होती है तो पूरा परिवार शिक्षित होता है और जब एक महिला सशक्त होती है तो समाज सशक्त होता है।


डॉ. तोषण मीनपाल ने कहा कि महिला दिवस केवल औपचारिक शुभकामनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इतिहास में महिलाओं के योगदान को स्मरण करने का अवसर है। उन्होंने उल्लेख किया कि जिन कालखंडों में महिलाओं को कमजोर या अशिक्षित समझा जाता था, उन समयों में भी भारतीय संस्कृति ने उनकी शक्ति और भूमिका को सम्मान दिया।
निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव ने सेंटर फॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम्स को इस महत्वपूर्ण विषय पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए बधाई दी। उन्होंने इतिहास की विदुषी महिलाओं और समकालीन नारी शक्तियों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं ने राष्ट्र निर्माण में असाधारण भूमिका निभाई है। उन्होंने महिलाओं को आत्मविश्वास के साथ कार्य करने, निरंतर शिक्षा ग्रहण करने, विविध कौशल विकसित करने और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि वैदिक काल में महिलाओं को जीवनसाथी चयन का मूल अधिकार प्राप्त था और आठ प्रकार के विवाह मान्य थे। उन्होंने माता गार्गी का उदाहरण देते हुए कहा कि गार्गी ने ब्रह्मविद्या पर गहन ज्ञान प्रदर्शित किया और याज्ञवल्क्य जैसे महर्षियों से शास्त्रार्थ किया। उपनिषदों में वर्णित गार्गी-याज्ञवल्क्य संवाद भारतीय दार्शनिक परंपरा का महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने कहा कि उस काल में महिलाएं तर्क-वितर्क और दार्शनिक विमर्श में सक्रिय भागीदारी करती थीं, जो उनकी बौद्धिक और आध्यात्मिक समानता को दर्शाता है। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी की महिलाओं से आग्रह किया कि वे वैदिक काल की विदुषियों के जीवन और योगदान का अध्ययन करें, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी उनसे प्रेरणा ले सकें।

ज्योति रमना राव ने कहा कि महिला दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि महिलाओं की उत्कृष्टता का सम्मान प्रतिदिन होना चाहिए। उन्होंने प्राचीन ग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं को शिक्षा का अधिकार प्राप्त था और उन्होंने उच्च पदों तक पहुंचकर समाज में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
डॉ. शुभ्रता गुप्ता ने कहा कि वैदिक समाज में महिलाओं को विशेष सम्मान प्राप्त था। वे राजनीतिक सलाहकार और नैतिक चिंतक के रूप में निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित करती थीं। डॉ. अर्चना शर्मा ने कहा कि प्राचीन काल से लेकर वर्तमान समय तक महिलाओं का योगदान समाज और राष्ट्र के विकास में निर्णायक रहा है। आज महिलाएं अपनी स्वतंत्रता और क्षमता का उपयोग करते हुए सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में अग्रसर हैं।
समारोह का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा में महिलाओं की बौद्धिक विरासत को रेखांकित करना तथा विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों के बीच शैक्षणिक संवाद को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम का समापन डॉ. मीना मुर्मू के धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ।


