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प्रकृति और जिंदगी की विकट परिस्थितियों ने हमें रिश्तों का बड़ा महत्व समझाया है, सिखाया है और यह बताया है कि अपनी इस छोटी सी जीवन यात्रा में, छोटी छोटी बातों को पकड़ कर नहीं रखना है और ना ही ज्यादा रूठना है, ना बिगड़ना है, ना ही क्रोध करना है और खुद व दूसरों को क्षमा करना है। परिवार व समाज में एकजुटता का परिचय देना है । सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए भ्रसक प्रयास करने हैं । प्रकृति और जीवन की चुनौतियाँ अक्सर हमें उन बुनियादी सच्चाइयों की ओर ले जाती हैं जिन्हें हम भागदौड़ में भूल जाते हैं। संकट के समय जब बाहरी सुख-सुविधाएँ और भौतिक साधन साथ छोड़ देते हैं, तब केवल अपनों का साथ और रिश्तों की गर्माहट ही हमें संबल देती है।
मानव जीवन और प्रकृति का गहरा संबंध है। जहाँ प्रकृति हमें जीवन देती है, वहीं समय-समय पर आने वाली इसकी विकट परिस्थितियाँ हमें जीवन का असली पाठ भी पढ़ाती हैं। प्रकृति और जीवन की विषमताएँ हमें आईना दिखाती हैं। वे हमें समझाती हैं कि धन-दौलत और शोहरत अस्थायी हैं, लेकिन सच्चे रिश्ते जीवन की सबसे बड़ी पूँजी हैं। हमें मुश्किल वक्त का इंतज़ार किए बिना आज से ही अपने रिश्तों को समय, सम्मान और प्रेम देना चाहिए।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

