मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
जब हम कुछ नया करने की कोशिश करते हैं, तो गलती होना स्वाभाविक है। हर गलती हमें यह बताती है कि कौन सा तरीका काम नहीं कर रहा है, जिससे हम सही दिशा की ओर बढ़़ते हैं। किताबी ज्ञान से ज्यादा इंसान अपनी गलतियों से सीखता है। ठोकर खाकर मिला अनुभव भविष्य में आने वाली बड़ी मुश्किलों के लिए हमें तैयार करता है । जब हम गलतियों को स्वीकार कर लेते हैं, तो हमारे अंदर से ‘असफलता का डर’ निकल जाता है। यह निडरता ही हमें बड़े जोखिम लेने और कुछ नया करने की हिम्मत देती है।
सफलता की सीढ़ी कभी सीधी नहीं होती, इसमें कई उतार-चढ़ाव होते हैं। गलतियाँ हमारे चरित्र को मज़बूत बनाती हैं और हमें ‘लचीला’ बनाती हैं । गलतियाँ हमें रुककर सोचने पर मजबूर करती हैं। वे एक सिग्नल की तरह हैं, जो कहती हैं कि यहाँ थोड़ा सुधार या बदलाव की जरूरत है। अगर आप गलती कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आप प्रयास कर रहे हैं और आगे बढ़़ रहे हैं। जो लोग कुछ नहीं करते, उनसे कभी गलती नहीं होती। इसलिए गलतियों से घबराएं नहीं, उन्हें अपनी प्रगति की रिपोर्ट समझें।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

