मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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कहा जाता है कि “बाण से हुआ घाव भर सकता है, लेकिन वाणी से हुआ घाव कभी नहीं भरता।” तलवार केवल मांस और खाल को काटती है, जिसका इलाज चिकित्सा द्वारा संभव है, लेकिन कड़वे शब्द सीधे मनुष्य की आत्मा और उसके आत्मसम्मान पर प्रहार करते हैं, जिनका कोई मरहम नहीं होता। जब कोई व्यक्ति किसी के लिए अपमानजनक या कड़वे शब्दों का प्रयोग करता है, तो वह उसके आत्मविश्वास को झकझोर देता है। गुस्से में बोले गए कुछ कड़वे शब्द वर्षों पुराने मजबूत रिश्तों को भी पल भर में खत्म कर सकते हैं।
शब्दों में असीम शक्ति होती है। जहाँ कड़वे शब्द विनाश का कारण बनते हैं, वहीं मीठे शब्द मरहम का काम करते हैं। एक समझदार व्यक्ति हमेशा अपनी वाणी पर संयम रखता है क्योंकि वह जानता है कि कमान से निकला तीर और जुबान से निकले शब्द कभी वापस नहीं आते। तलवार की धार से ज्यादा धारदार हमारी जुबान होती है। हमें बोलने से पहले हमेशा यह सोचना चाहिए कि हमारे शब्द किसी के स्वाभिमान को ठेस तो नहीं पहुँचा रहे। शरीर के जख्मों के निशान मिट सकते हैं, परंतु मन पर लगे शब्दों के निशान ताउम्र साथ रहते हैं। इसलिए, हमें हमेशा मधुर और मर्यादित भाषा का प्रयोग करना चाहिए ताकि रिश्ते और इंसानियत दोनों सुरक्षित रहें।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

