10 सूत्रीय मांगों पर राष्ट्रव्यापी हड़ताल सफल, बिलासपुर में मजदूर–किसानों का जोरदार प्रदर्शन
मूकनायक
कमलेश लवहात्रै छत्तीसगढ़ प्रभारी
बिलासपुर छत्तीसगढ़
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और विभिन्न क्षेत्रीय फेडरेशनों के आह्वान पर मजदूरों, किसानों, नौजवानों और छात्रों के अधिकारों व आजीविका की रक्षा के लिए बुलाई गई राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल को बिलासपुर जिले में व्यापक समर्थन मिला। विभिन्न संगठनों ने एकजुटता प्रदर्शित करते हुए हड़ताल को सफल बनाया।
सभा की अध्यक्षता एटक के जिला सचिव कॉमरेड पवन शर्मा ने की। कार्यक्रम में एटक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कॉम. हरिद्वार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभा को एटक जिला सचिव कॉम. पवन शर्मा, अखिल भारतीय नौजवान सभा के प्रदेश अध्यक्ष कॉम. विक्रांत शर्मा, एआईएसएफ के प्रदेश उपाध्यक्ष कॉम. धीरज शर्मा, एटक उपाध्यक्ष कॉम. हरिद्वार सिंह तथा ट्रेड यूनियन काउंसिल के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने केंद्र सरकार की मजदूर, किसान, नौजवान और छात्र विरोधी नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि देश को संविधान के अनुरूप चलाया जाना चाहिए। उन्होंने निजीकरण, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और पेट्रोल, डीजल व गैस सिलेंडर के बढ़ते दामों के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार की नीतियों से देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति बनी हुई है।
सभा के उपरांत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और ट्रेड यूनियन काउंसिल के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम तथा जिला प्रशासन को 10 सूत्रीय (विस्तारित 12 बिंदुओं सहित) मांगपत्र सौंपा गया।
प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
चारों श्रम संहिताएं (लेबर कोड) वापस ली जाएं।
बैंक, बीमा, डाक, रेल, बीएसएनएल, कोल, भेल, स्टील, सीमेंट, एयरलाइंस सहित सभी सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगे तथा बिजली के निजीकरण व स्मार्ट मीटर व्यवस्था वापस हो।
मनरेगा में 200 दिन काम और ₹700 प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित की जाए।
किसानों से हुए सात सूत्रीय समझौते लागू हों और कृषि क्षेत्र में विदेशी दखल बंद किया जाए।
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं।
प्रतिवर्ष 2 करोड़ रोजगार देने का वादा पूरा किया जाए।
शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, बिजली और भोजन की निःशुल्क व्यवस्था हो।
धार्मिक एवं जातीय भेदभाव पर रोक लगे।
55 वर्ष से अधिक मजदूरों, किसानों, विधवाओं, परित्यक्ताओं व दिव्यांगों को ₹10,000 मासिक पेंशन दी जाए।
ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर संविदा कर्मियों को न्यूनतम ₹30,000 मासिक वेतन दिया जाए।
भगत सिंह रोजगार गारंटी योजना (BANEGA) लागू की जाए।
बिलासपुर जिले के लिंगियाडीह एवं देवरीखुर्द सहित वर्षों से काबिज परिवारों को पट्टा एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ₹5 लाख की सहायता दी जाए।
सभा में बड़ी संख्या में मजदूरों, किसानों और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया और आंदोलन को मजबूत करने का संकल्प लिया।
विनीत
कॉम. पवन शर्मा
जिला सचिव, एटक
जिला बिलासपुर, छत्तीसगढ़



