स्टील सिटीज़ यूनाइटेड: आसनसोल–बोकारो मेमू ‘लाइफलाइन’ को मिली हरी झंडी
पूर्वी भारत के औद्योगिक केंद्रों को जोड़ने वाला नया रेल कॉरिडोर
मूकनायक
कमलेश लवहात्रै छत्तीसगढ़ प्रभारी
बिलासपुर छत्तीसगढ़
पूर्वी भारत के औद्योगिक नक्शे में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया, जब बहुप्रतीक्षित आसनसोल–बोकारो स्टील सिटी मेमू सेवा का औपचारिक शुभारंभ किया गया। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस सेवा को हरी झंडी दिखाई। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री सुवेंदु अधिकारी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
यह समर्पित मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (MEMU) सेवा पश्चिम बर्धमान, पुरुलिया और बोकारो जैसे औद्योगिक व अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ते हुए एक सशक्त “स्टील कॉरिडोर” के रूप में उभरी है। वर्षों से महंगे और असुविधाजनक बस सफ़र या अनियमित ट्रेनों पर निर्भर रहे हज़ारों कामगारों, विद्यार्थियों और छोटे व्यापारियों के लिए यह सेवा किसी जीवनरेखा से कम नहीं है।
औद्योगिक और सामाजिक बदलाव की नई रफ्तार
नई मेमू सेवा से दोनों राज्यों में स्थित सेल (SAIL) इकाइयों के तकनीकी कर्मचारियों और श्रमिकों को दैनिक आवागमन का भरोसेमंद साधन मिलेगा। इससे न केवल समय और लागत की बचत होगी, बल्कि औद्योगिक समन्वय भी मज़बूत होगा।
मध्यवर्ती स्टेशनों पर ठहराव से पुरुलिया और आसपास के ग्रामीण अंचलों को बड़े औद्योगिक बाज़ारों से सीधी और किफायती कनेक्टिविटी मिली है। वहीं, सैकड़ों विद्यार्थी अब राज्य सीमा पार कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों तक रोज़ाना आ-जा सकेंगे।
किफ़ायती, सुरक्षित और सर्व-ऋतु परिवहन
कम लागत वाले मासिक सीज़न टिकटों से दैनिक मज़दूरों और नियमित यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। सड़क यातायात की तुलना में यह विद्युत रेल सेवा मानसून, जाम और ईंधन लागत जैसी समस्याओं से मुक्त, अधिक सुरक्षित और समयबद्ध विकल्प प्रदान करती है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
नियमित यात्री आवाजाही से छोटे स्टेशनों के आसपास व्यापार, दुकानें और सेवाएं विकसित होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय रोज़गार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
जनहित में अपील
यात्रियों और स्थानीय नागरिकों ने रेल मंत्रालय से इस मेमू सेवा की फ्रीक्वेंसी बढ़ाने, सुबह-शाम अतिरिक्त फेरे शुरू करने, तथा भविष्य में तेज़ मेमू या पैसेंजर एक्सप्रेस सेवाएं जोड़ने की मांग की है, ताकि बढ़ती यात्री संख्या की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
यह रेल सेवा केवल दो स्टील शहरों को नहीं जोड़ती, बल्कि रोज़गार, शिक्षा और समावेशी विकास को पटरी पर लाते हुए पूर्वी भारत के औद्योगिक भविष्य को नई दिशा देती है।


