मूकनायक/ रिपोर्टर इंद्रसेन गौतम बस्ती /उत्तर प्रदेश
बस्ती: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा करती हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही हैं सरकार द्वारा ग्रामीणों को रोजगार देने के लिए चलाई जा रही ‘मनरेगा’ योजना बस्ती जिले के सल्टौआ ब्लॉक के अंतर्गत जोगिया जूड़ी कुइयां ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है।
ताज्जुब की बात यह है कि ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक शिकायत करने के बावजूद, प्रधान और रोजगार सेवक के हौसले पस्त होने के बजाय और बुलंद हो गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान और रोजगार सेवक की मिलीभगत से फर्जी हाजिरी का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है।
और रोजगार सेवक का कहना है कि काम हो रहा है और ग्रामीण इसलिए बोल रहे हैं झूठ हैं की ग्राम के कुछ व्यक्तियों को प्रधान से अच्छे व्यवहार नहीं है
पत्रकार टीम जब मौके पर जाकर जमीनी हकीकत देखी गई, तो वहां कोई भी कार्य होता नहीं पाया गया।
स्थानीय निवासियों ने पुष्टि की है कि पंचायत में पिछले लंबे समय से कोई काम नहीं हुआ है, जबकि मनरेगा पोर्टल पर नियमित रूप से हाजिरी भरी जा रही है।
डिजिटल इंडिया के दौर में जहां पारदर्शिता की बात की जाती है, वहीं जोगिया जूड़ी कुइयां में पोर्टल पर पिछले कई दिनों से एक ही पुरानी फोटो अपलोड कर मस्टरोल भरा जा रहा है यह तकनीकी खामी नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करता है।
- बीडीओ से शिकायत पर “देख लेंगे” कहकर पल्ला झाड़ लिया। खबर चलने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- डीसी मनरेगा यहाँ सरकारी नंबर पर फोन कई बार किया गया लेकिन फोन नही उठा रहे है जब पत्रकारों का फोन नहीं उठा रहा है तो आम नागरिक का क्या होता होगा वही जमीनी हकीकत रोज कार्य ना किया जाना और प्रधान द्वारा लगाई जाने वाली फर्जी हाजिरी की संख्या और बढ़ गई।
- सीडीओ (मुख्य विकास अधिकारी) को मामले से अवगत कराया गया, लेकिन वहां से भी केवल आश्वासन ही मिला।
- डीएम जिले के सबसे बड़े अधिकारी तक पत्रकारों द्वारा बताया गया की सरकारी नंबर पर फोन किया जाता है लेकिन फोन उठता नहीं उन्होंने कहा चेक करवाते हैं उसके बावजूद अगले दिन फिर काल किया गया तो वही हाल रहा फोन ना उठा
ग्रामीणों में आक्रोश
प्रशासनिक शिथिलता के कारण ग्रामीणों में भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और शिकायतों को कूड़ेदान में डाल दिया जाए, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? आखिर किसके संरक्षण में यह फर्जीवाड़ा फल-फूल रहा है?

