मूकनायक/ दुर्गेंद्र सम्राट ब्यूरो प्रभारी बस्ती/ उत्तर प्रदेश
बस्ती। सरयू नदी में पुलिस उपनिरीक्षक अजय कुमार का शव मिलने से पूरे पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। जिस अधिकारी पर कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी थी, उसी की लाश नदी में मिलने से अब सवाल पुलिस सिस्टम पर उठने लगे हैं। शव को नदी से निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए पीएम हाउस लाया गया, लेकिन पोस्टमार्टम से पहले ही मामले ने तूल पकड़ लिया।
मृतक के परिजनों ने इसे सामान्य मौत मानने से साफ इनकार करते हुए साजिशन हत्या का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि अजय कुमार को जानबूझकर निशाना बनाया गया और अब विभाग इस पूरे मामले में लीपापोती करने की कोशिश कर रहा है।
परिवार का आरोप है कि उन्होंने DIG बस्ती से मुलाकात कर अपनी आशंकाएं खुलकर रखीं, लेकिन अब तक उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया। परिजनों का कहना है कि जब एक पुलिस अधिकारी की मौत पर भी विभाग स्पष्ट रुख नहीं ले पा रहा, तो आम आदमी को न्याय कैसे मिलेगा।
मृतक के भाई, जो स्वयं एक अधिकारी हैं, ने बेहद सख्त शब्दों में सवाल उठाया। उन्होंने कहा “मैं खुद एक ऑफिसर हूं और सिस्टम को समझता हूं। अगर जांच निष्पक्ष है तो जिस इंस्पेक्टर पर सवाल उठ रहे हैं उसे अब तक सस्पेंड क्यों नहीं किया गया? यह देरी साफ तौर पर संदेह पैदा करती है।”
परिजनों ने आरोप लगाया कि जांच को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है और प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है। परिवार ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे इस मामले को मुख्यमंत्री तक ले जाएंगे और किसी भी कीमत पर इसे दबने नहीं देंगे।
घटना के बाद बस्ती समेत आसपास के इलाकों से कई सामाजिक संगठनों के लोग पीएम हाउस पहुंचे। संगठनों ने पुलिस विभाग के खिलाफ नाराज़गी जताते हुए कहा कि जब एक ईमानदार अधिकारी ही सुरक्षित नहीं है, तो जनता की सुरक्षा का दावा खोखला है। उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
जब इस पूरे मामले पर पत्रकारों ने DIG बस्ती से सवाल किए, तो उन्होंने कहा कि परिवार की ओर से साजिश का आरोप लगाया गया है और मामले की जांच की जा रही है। DIG ने यह जरूर कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, लेकिन किसी भी अधिकारी पर कार्रवाई या निलंबन को लेकर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
यही चुप्पी अब पुलिस विभाग पर सबसे बड़ा सवाल बन गई है। परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम और जांच के नाम पर समय खींचा जा रहा है, ताकि मामला ठंडा पड़ जाए।
फिलहाल SSI अजय कुमार की मौत रहस्य बनी हुई है। यह आत्महत्या थी, दुर्घटना या फिर सुनियोजित साजिश — इसका जवाब जांच से पहले ही सिस्टम के रवैये पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस विभाग अपने ही अधिकारी को न्याय दिला पाएगा या यह मामला भी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा।

