Thursday, February 26, 2026
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सरकार से धोखाधड़ी, बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़—भोजन बनाने वाली समूह की मनमानी पर सवालशासकीय माध्यमिक शाला पदमपुर में नियमों की खुलेआम अनदेखी, जिम्मेदार कौन?

मूकनायक समाचार / सत्यशील गोंडाने (बालाघाट)

बालाघाट जिले की तहसील वारासिवनी अंतर्गत संकुल मेंढकी की शासकीय माध्यमिक शाला पदमपुर में बच्चों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ का मामला सामने आया है। एक ओर मध्य प्रदेश शासन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा स्पष्ट निर्देश हैं कि विद्यालयों में बच्चों को धुआं-रहित (एलपीजी गैस पर बना) भोजन उपलब्ध कराया जाए, वहीं दूसरी ओर पदमपुर स्कूल में इन आदेशों को ठेंगा दिखाया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय में गैस पर भोजन बनाने के बजाय चूल्हे पर खाना पकाया जा रहा है। यह न केवल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि शासन द्वारा निर्धारित मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) के मानकों का भी सीधा उल्लंघन है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि गैस मद का भुगतान शासन से नियमित रूप से आता है, इसके बावजूद संबंधित समूह द्वारा गैस सिलेंडर नहीं भरवाए जा रहे और मनमाने ढंग से चूल्हे पर भोजन बनाया जा रहा है।
विद्यालय के प्रधान पाठक द्वारा इस विषय में कई बार समूह को समझाइश दी जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद समूह अपनी मनमानी पर अड़ा हुआ है। इससे स्पष्ट होता है कि या तो निगरानी व्यवस्था कमजोर है या फिर जानबूझकर नियमों की अनदेखी की जा रही है।
चूल्हे पर खाना बनाने से निकलने वाला धुआं बच्चों के लिए श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ाता है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब शासन स्पष्ट रूप से गैस पर भोजन बनाने हेतु राशि उपलब्ध करा रहा है, तो फिर उस राशि का उपयोग कहां हो रहा है? क्या यह सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं है?
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने शासन-प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। मांग की जा रही है कि मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता न हो और शासन की मंशा के अनुरूप धुआं-रहित, सुरक्षित भोजन सुनिश्चित किया जा सके।
अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर कितनी शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई करता है, या फिर बच्चों के स्वास्थ्य के साथ यह खिलवाड़ यूं ही चलता है।

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