Thursday, February 26, 2026
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समता, करुणा और मानवता के आलोक में मनाई जाएगी,विश्व गुरु संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 649वीं जयंती

समता, करुणा और मानवता के आलोक में मनाई जाएगी,विश्व गुरु संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 649वीं जयंती

मूकनायक
कमलेश लवहात्रै छत्तीसगढ़ प्रभारी

रायपुर छत्तीसगढ़

भारतीय संत परंपरा के उज्ज्वल नक्षत्र, समता, मानवता और सामाजिक न्याय के अमर उद्घोषक विश्व गुरु संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 649वीं जयंती के पावन अवसर पर सर्व रविदास समाज छत्तीसगढ़ द्वारा एक भव्य प्रदेश स्तरीय समारोह का आयोजन किया जा रहा है। यह ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक आयोजन 8 फरवरी 2026 को प्रज्ञा गिरी, डोंगरगढ़ (जिला राजनांदगांव) की पुण्यभूमि पर श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक चेतना के वातावरण में संपन्न होगा।
इस महत्त्वपूर्ण आयोजन को गरिमा प्रदान करने हेतु 27 जनवरी 2026 की रात्रि 11:30 बजे सर्व रविदास समाज छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट कर उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा) श्री ध्रुव कुमार मिर्धा ने किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रतिनिधिमंडल की भावनाओं और उद्देश्य को आत्मीयता से सुनते हुए 8 फरवरी को प्रदेश स्तरीय गुरु रविदास जयंती समारोह में सम्मिलित होने की सहमति प्रदान की, जिससे समाज के प्रत्येक वर्ग में हर्ष, गर्व और उत्साह की लहर दौड़ गई।
प्रतिनिधिमंडल में सर्व रविदास समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर विजय मेहरा, प्रदेश कोषाध्यक्ष नरेंद्र लाल चंचल, प्रदेश विधि सलाहकार डॉ. वेणुधर रौतिया, प्रदेश महासचिव खेमराज बाकरे, संगठन सचिव मदन लाल मोहबे, प्रचार सचिव डॉ. चंद्रशेखर खरे, महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश उपाध्यक्ष कु. रानी बघेल, युवा प्रकोष्ठ के प्रदेश संरक्षक राकेश मेहर, ओम प्रकाश मिरी, डॉ. धर्मेन्द्र खरे सहित समाज के अनेक समर्पित पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर विजय मेहरा ने कहा कि यह समारोह केवल एक जयंती आयोजन नहीं, बल्कि गुरु रविदास महाराज के विचारों को समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुँचाने का एक सशक्त प्रयास है।
संत रविदास महाराज के जीवन और दर्शन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि गुरु रविदास महाराज मध्यकालीन भारत के ऐसे युगपुरुष थे, जिन्होंने सामाजिक विषमता, जातिगत भेदभाव और रूढ़ियों के विरुद्ध अपनी वाणी को शस्त्र बनाया। काशी की पवित्र धरती पर जन्मे गुरु रविदास महाराज ने यह सिद्ध किया कि मनुष्य की महानता उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्म, चरित्र और चिंतन से निर्धारित होती है। उनका अमर संदेश — “मन चंगा तो कठौती में गंगा” — आज भी मानव मन को पवित्रता, सत्य और आत्मबोध की ओर प्रेरित करता है।
गुरु रविदास महाराज के पद, भजन और उपदेश आज भी गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित होकर मानव एकता, प्रेम और समानता का शाश्वत संदेश दे रहे हैं। उनका संपूर्ण जीवन संघर्ष, साधना और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने ऐसे समाज की कल्पना की, जहाँ कोई ऊँचा-नीचा न हो और प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार प्राप्त हो।
प्रदेश स्तरीय गुरु रविदास जयंती समारोह के माध्यम से उनके इसी समतामूलक, न्यायपूर्ण और मानवतावादी दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया जाएगा। मुख्यमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति इस आयोजन को नई ऊर्जा, दिशा और प्रेरणा प्रदान करेगी।

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