मूकनायक/ सत्यशील गोंडाने बालाघाट/ मध्य प्रदेश
कभी-कभी कुछ जन्मदिन ऐसे होते हैं, जो उत्सव नहीं, बल्कि भावनाओं का सैलाब लेकर आते हैं बालाघाट की धरती ने ऐसे ही एक वीर सपूत को उसके जन्म दिवस पर 21 फ़रवरी को नमन किया है! नक्सल मोर्चे पर मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीद हॉक फोर्स के निरीक्षक आशीष शर्मा के जन्मदिवस के अवसर पर बालाघाट के ग्रामीण थाना परिसर में उनकी प्रतिमा और स्मृति उद्यान का लोकार्पण किया गया। जब प्रतिमा से आवरण हटा, तो माहौल में गर्व भी था और आंखों में नमी भी! इस कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा, थाना प्रभारी अमित अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी, जवान और नागरिकगण मौजूद रहे। कार्यक्रम में जैसे ही शहीद आशीष शर्मा की प्रतिमा से कपड़ा हटाया गया, पूरा परिसर शहीद अमर रहें के नारों से गूंज उठा। इस दौरान मां भारती के इस सपूत को प्रतिमा के सामने सलामी देते जवानों की आंखें नम थीं, पर दिल में वही देश सेवा का जज़्बा था। यहां अधिकारियों ने कहा, आशीष शर्मा केवल एक पुलिस अधिकारी नहीं थे बल्कि वे साहस, नेतृत्व और कर्तव्यपरायणता की सजीव मिसाल थे। जिन्होंने दिखा दिया कि वर्दी सिर्फ कपड़ा नही, बल्कि जिम्मेदारी और बलिदान का प्रतीक होती है।
बता दे 19 नवंबर 2025 की रात तीन राज्यों मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ के सुरक्षाबल के जवान संयुक्त एंटी-नक्सल अभियान पर निकले थे। सूचना थी कि छत्तीसगढ़ के बोरतलाव थाना क्षेत्र के जंगल में नक्सली छिपे हैं। सुचना पर आधी रात को तीन टीमें सर्चिंग के लिए रवाना हुई जिसमें एक टीम का नेतृत्व आशीष शर्मा कर रहे थे! तभी अचानक जंगल में पहले से घात लगाए बैठे नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी जिसमें मातृभूमि की रक्षा करते हुए आशीष शर्मा शहीद हो गए! आज उनकी प्रतिमा सिर्फ पत्थर नहीं है! वह उस अधूरे सपने की याद, उस साहस की पहचान है जो हर जवान के दिल में देश के लिए धड़कता है।

