Thursday, February 26, 2026
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विश्व सामाजिक न्याय दिवस पर महिला श्रमिकों को दी पोश अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी

मूकनायक/नरेश जाटव/कैलादेवी/ करौली/राजस्थान।

करौली। विश्व सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन एवं एक्शनएड एसोसिएशन इंडिया द्वारा एक्शनएड की क्षेत्रिय प्रबंधक सिओन किंगोरी के मार्गदर्शन में भीयापुर गांव करौली में महिला कृषि मजदूरों के साथ जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
एक्शनएड जिला समन्वयक दिनेश कुमार बैरवा ने बताया कि 20 फरवरी को विश्व सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर कृषि महिला श्रमिकों के साथ जागरूकता बैठक आयोजित की गई। जिसका उद्देश्य लैंगिक समानता, सम्मानजनक काम, उचित मजदूरी, और सरकारी योजनाओं (जैसे स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा) के बारे में जानकारी देना है। यह बैठकें ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
कृषि क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को मान्यता देना, समान अवसर सुनिश्चित करना और गरीबी व भेदभाव को खत्म करने पर जोर दिया गया। जिसमें समान कार्य, समान वेतन पुरुष श्रमिकों के बराबर मजदूरी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
जिला समन्वयक ने सामाजिक सुरक्षा और अधिकार जिसमें स्वास्थ्य बीमा, श्रम अधिकार, और सुरक्षित कार्य वातावरण के बारे में जानकारी दी। महिला श्रमिकों को कृषि सब्सिडी, कौशल विकास और ऋण सुविधा की जानकारी दी । ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें।
जिला समन्वयक बैरवा ने लैंगिक असमानता के अंत पर जोर देते हुए ग्रामीण महिलाओं को कृषि की मुख्यधारा में लाकर सशक्त बनाने हेतु एसोसिएशन इंडिया द्वारा चलाए जा रहे पोश अधिनियम जागरूकता अभियान के बारे में बताया।
जिसमें समुदाय एवं महिला श्रमिकों में POSH अधिनियम (कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013) के प्रति जागरूकता बढाना एवं उत्पीड़न की शिकायत स्थानीय शिकायत समिति,
नजदीकी पुलिस थाना, राष्ट्रीय एवं राज्य महिला आयोग की बेबसाइट एवं शी – बोक्स (she – box) पोर्टल पर करने एवं उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित करना है। एक्शनएड के मानवाधिकार रक्षक जगदीश जाट ने महिला कृषि श्रमिकों को कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण के संबंध में जानकारी दी। जिसमें महिला श्रमिकों को बताया कि पोश अधिनियम 2013 में पारित किया गया था
और इसका उद्देश्य एक सुरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करना है जहाँ महिलाएँ उत्पीड़न के डर के बिना काम कर सकें। पोश अधिनियम में यौन उत्पीड़न को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिसमें अवांछित शारीरिक संपर्क, यौन अनुग्रह की मांग, अश्लील साहित्य दिखाना, और यौन प्रकृति का कोई भी अवांछित व्यवहार शामिल है।
यह अधिनियम महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से बचाता है, जिससे वे सुरक्षित और गरिमापूर्ण वातावरण में काम कर सकती हैं।
उन्होंने बताया कि ईंट भट्टों, भवन निर्माण, सड़क निर्माण, खान, साफ सफाई एवं घरेलू कार्य करने वाली महिलाओं के साथ कार्यस्थल पर उत्पीड़न की संभावना अधिक रहती है।
महिला श्रमिकों के साथ कार्यस्थल पर ठेकेदार, मालिक, या अन्य व्यक्ति उत्पीड़न करता है तो महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में जागरूक करता है तो अधिनियम में शिकायत दर्ज करने और निवारण की प्रक्रिया निर्धारित की गई हैं।
महिलाओं को आंतरिक एवं स्थानीय शिकायत समितियों को शिकायत करने एवं महिला श्रमिकों को उत्पीड़न से बचाने का आव्हान किया।

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