मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन एक वृक्ष की तरह है, जहाँ संघर्ष और चुनौतियाँ उन ‘खट्टे फलों’ के समान हैं, जो शुरुआत में हमें निराश कर सकते हैं। लेकिन प्रकृति का नियम है कि हर फल को पकने के लिए एक निश्चित समय और सही वातावरण की आवश्यकता होती है। प्रकृति के इस धैर्य से हम यह सीख सकते हैं कि वक्त की मार और कठिन परिस्थितियाँ हमें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि निखारने के लिए आती हैं। जब इंसान हार मान लेता है, तो वह वहीं रुक जाता है। लेकिन जो ‘हिम्मत’ बनाए रखता है, वह हर खट्टे अनुभव को एक सीख में बदल देता है।
इसलिए, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों ना हों, अपनी मेहनत और हिम्मत को कम ना होने दें। समय आने पर परिस्थितियाँ स्वतः बदल जाती हैं, बशर्ते आप मैदान छोड़कर ना भागें। याद रखें कि सूरज की तपिश ही फलों में मिठास भरती है, उसी तरह संघर्ष की तपन आपके जीवन को सफलता की मिठास से भर देगी। बस अपनी मेहनत जारी रखें और समय पर भरोसा रखें, आपकी मेहनत के ‘खट्टे फल’ भी एक दिन मिठास से भर जाएंगे।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

