Thursday, February 26, 2026
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रिश्तों में समर्पण, विश्वास, और समझ ही उसे टिकाए रखने की है कुंजी

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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रिश्ते भरोसे की बुनियाद पर टिके होते हैं, लेकिन गलतफहमी वह दीमक है जो इस बुनियाद को अंदर ही अंदर खोखला कर देती है। अक्सर हम सामने वाले की परिस्थिति को समझे बिना अपनी धारणा बना लेते हैं। बिना कसूर के दूरियों की परिस्थितियाँ कई बार ऐसी होती हैं कि व्यक्ति चाहकर भी सच नहीं कह पाता या उसके शब्दों का गलत अर्थ निकाल लिया जाता है। इसमें किसी का इरादा बुरा नहीं होता, बस ‘नजरिए’ का अंतर होता है। एक व्यक्ति अपनी जगह सही होता है और दूसरा अपनी जगह, लेकिन बीच में खड़ी गलतफहमी उन्हें दुश्मन बना देती है।
संवाद ही समाधान है
किसी भी रिश्ते को बचाने के लिए संवाद ही समाधान है, जबकि मौन रहने से भी दूरियां बढ़़ती हैं और खुलकर बात करने से उलझने सुलझ जाती हैं। वर्तमान में रिश्ता तोड़ना आसान है, लेकिन उसे निभाना साहस का काम है। अगर रिश्ता कीमती है, तो अहंकार को पीछे छोड़कर स्पष्टीकरण मांग लेना चाहिए। याद रखें, किसी भी गलतफहमी की उम्र आपके रिश्ते की खूबसूरती से बड़ी नहीं होनी चाहिए।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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