


खैरलांजी-/मूकनायक समाचार सत्यशील गोंडाने(बालाघाट)
(जिला–बालाघाट)।यू.जी.सी. बिल के समर्थन में और उस पर लगी रोक को तत्काल वापस लेने की मांग को लेकर एससी, एसटी एवं ओबीसी सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं का गुस्सा अब सड़कों पर साफ नजर आने लगा है। जनपद पंचायत प्रांगण खैरलांजी में आयोजित एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन के बाद संघर्षरत कार्यकर्ताओं ने तहसीलदार महोदया छवि पंत को महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए दो टूक चेतावनी दी कि यदि वंचित समाज के अधिकारों के साथ हो रहा अन्याय नहीं रुका, तो आंदोलन और उग्र होगा।
धरना स्थल पर वक्ताओं ने तीखे शब्दों में कहा कि यू.जी.सी. अधिनियम 15/01/2026 को लागू होने के बावजूद उस पर रोक लगाना बहुजन समाज के भविष्य पर सीधा हमला है। यह सिर्फ एक बिल नहीं, बल्कि एससी-एसटी-ओबीसी समाज के छात्रों, कर्मचारियों और युवाओं के हक़ की लड़ाई है, जिसे किसी भी कीमत पर कुचलने नहीं दिया जाएगा।
मुख्य मांगों पर तीखा हमला
कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
यू.जी.सी. अधिनियम को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को फौरन हटाया जाए।
ओबीसी की जातिगत जनगणना कर सच्चाई देश के सामने लाई जाए।
जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण लागू कर उसे संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल किया जाए।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार और व्यवस्था यदि आंखें मूंदे बैठी रही, तो यह आंदोलन तहसील से निकलकर जिला, संभाग और राजधानी तक पहुंचेगा।
प्रशासन को सौंपा गया सख्त संदेश
धरना-प्रदर्शन के बाद तहसीलदार महोदया छवि पंत को ज्ञापन सौंपते हुए आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि यह ज्ञापन अनुरोध नहीं, बल्कि चेतावनी है। प्रशासन ने ज्ञापन स्वीकार कर उच्च स्तर तक भेजने का आश्वासन दिया, लेकिन कार्यकर्ताओं ने दो टूक कहा कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए।
शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक आंदोलन
हालांकि कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित रहा, लेकिन मंच से यह साफ संदेश दिया गया कि धैर्य की भी एक सीमा होती है।
आंदोलन में मा. दुर्गाप्रसाद लिल्हारे, मा. भारतसिंह शिवहरे, मा. देवराज भोयर, मा. आलोक पाटिल, मा. द्रोणकुमार डोहरें ,अजाब शास्त्री बहुजन समाज पार्टी नेता सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, कर्मचारी और छात्र मौजूद रहे।
कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि यू.जी.सी. बिल को लेकर वंचित समाज की आवाज को अनसुना किया गया, तो आने वाले दिनों में और बड़ा, तीखा व निर्णायक आंदोलन देखने को मिलेगा।

