
मूकनायक समाचार / सत्यशील गोंडाने
खैरलांजी, बालाघाट
एससी-एसटी-ओबीसी सामाजिक संगठनों का आह्वान, जनपद पंचायत के सामने होगा आंदोलन
खैरलांजी (बालाघाट)। यूजीसी बिल को तत्काल लागू किए जाने सहित अन्य प्रमुख मांगों को लेकर आगामी 6 फरवरी 2026, शुक्रवार को जनपद पंचायत प्रांगण, खैरलांजी में एससी, एसटी एवं ओबीसी सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से प्रारंभ होगा।
आयोजन को लेकर क्षेत्र में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं तथा बड़ी संख्या में सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, अधिकारी-कर्मचारी एवं छात्र-छात्राओं की उपस्थिति की संभावना जताई जा रही है।
आयोजकों के अनुसार यह धरना-प्रदर्शन यूजीसी बिल के समर्थन में आयोजित किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उच्च शिक्षा में सामाजिक न्याय, प्रतिनिधित्व और आरक्षण की संवैधानिक भावना को सशक्त करने के लिए यूजीसी बिल को बिना किसी विलंब के प्रभावी किया जाना आवश्यक है।
प्रमुख मांगें
धरना-प्रदर्शन के माध्यम से निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाई जाएंगी—
यूजीसी अधिनियम दिनांक 15 जनवरी 2026 को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को तत्काल हटाया जाए।
जनगणना में ओबीसी की जातिगत जनगणना कराई जाए।
जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण लागू कर उसे संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल किया जाए।
भारतीय संविधान की 5वीं एवं 6वीं अनुसूची को लद्दाख में लागू करने की मांग करने वाले सोनम वांगचुक को तत्काल रिहा किया जाए।
आयोजकों ने बताया कि धरना-प्रदर्शन के पश्चात महामहिम राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा जाएगा। साथ ही सभी एससी, एसटी एवं ओबीसी अधिकारी-कर्मचारियों तथा छात्र-छात्राओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की गई है।
आंदोलन का निर्देशन-
इस आंदोलन के निर्देशक के रूप में—
दुर्गाप्रसाद लिल्हारे (उपाध्यक्ष, जनपद पंचायत खैरलांजी),
भारतसिंह शिवहरे (सामाजिक कार्यकर्ता),देवराज भोयर (संयोजक अभियान, मध्यप्रदेश)की भूमिका रहेगी।
इसके अतिरिक्त आयोजन में सुभाष झिरसागर, आलोक पाटिल, द्रोणकुमार डोहरें, भीमप्रकाश बोरकर, अनिल उडके, प्रफुल्ल नागपुरे, देवी लिंढारे, अनिल अग्ने, योगेश सलकिया, खुमेश डोंगरे सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक सक्रिय सहभागिता करेंगे।
आयोजकों का कहना है कि यह धरना-प्रदर्शन सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक सशक्त और निर्णायक कदम सिद्ध होगा।

