मूकनायक/आकाश घरडें,
बालाघाट
विधायक संजय उइके का सरकार पर सीधा हमला – “वन हमारे देवता, विनाश किसी कीमत पर मंजूर नहीं”
बालाघाट। नक्सलवाद के खात्मे के सरकारी दावों के बीच जंगलों में बढ़ती माइनिंग गतिविधियों ने जिले की सियासत में हलचल मचा दी है। कांग्रेस विधायक संजय उइके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया और खनन अनुमति प्रक्रिया को नियमों के खिलाफ बताया।
“जल-जंगल-जमीन हमारी आस्था, सौदेबाजी नहीं”
सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए विधायक उइके ने कहा कि आदिवासी समाज के लिए जंगल केवल संसाधन नहीं, बल्कि देवता के समान हैं। उन्होंने लोंगूर से पचामादादर के बीच प्रस्तावित बॉक्साइट खनन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह निर्णय स्थानीय भावनाओं और कानूनों की अनदेखी कर लिया गया है।
“फॉरेस्ट रिजर्व एक्ट और पेसा कानून की अनदेखी”
विधायक का दावा है कि खनन की प्रक्रिया में ‘फॉरेस्ट रिजर्व एक्ट’ और पेसा कानून का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा की सहमति के बिना आदिवासी क्षेत्र में किसी भी प्रकार का खनन गैरकानूनी है।
सर्वे रिपोर्ट पर भी उठे सवाल
माइनिंग के लिए तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट को लेकर भी विधायक ने पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाया। उन्होंने मांग की कि पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि क्षेत्र की जनता सच्चाई जान सके।
“जरूरत पड़ी तो होगा जनआंदोलन”
विधायक उइके ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो आदिवासी समाज के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
फिलहाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बालाघाट में यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप से गरमा चुका है और आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

