Thursday, February 26, 2026
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बाबा साहब के विचारों की मुखर आवाज बन रही मूकनायक पत्रिका : राहुल सिंह

मूकनायक/ दुर्गेंद्र सम्राट ब्यूरो प्रभारी बस्ती/ उत्तर प्रदेश

बस्ती। प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रेस क्लब के प्रदेश अध्यक्ष पत्रकार राहुल सिंह को मूकनायक पत्रिका भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने मूकनायक पत्रिका की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए इसे सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों की आवाज बुलंद करने वाला सशक्त माध्यम बताया।

राहुल सिंह ने कहा कि मूकनायक पत्रिका जिस उद्देश्य के साथ कार्य कर रही है, वह सीधे-सीधे संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों से जुड़ा हुआ है। बाबा साहब ने अपने पूरे जीवन में समाज के कमजोर, दलित, शोषित और मजदूर वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उन्होंने समाज की आवाज को मुखर करने के लिए मूकनायक जैसी पत्रिकाओं के माध्यम से जनचेतना जगाने का कार्य किया। उसी परंपरा को मूकनायक पत्रिका आज के दौर में आगे बढ़ा रही है, जो अत्यंत सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि आज भी समाज में ऐसे अनेक मुद्दे हैं, जो मुख्यधारा की मीडिया में अपेक्षित स्थान नहीं पा पाते। ऐसे में मूकनायक पत्रिका जैसे प्रयास न केवल जरूरी हैं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। यह पत्रिका निर्भीक होकर सच्चाई को सामने लाने का कार्य कर रही है और वंचित तबकों की समस्याओं, संघर्षों और उपलब्धियों को समाज के सामने रख रही है।

प्रेस क्लब अध्यक्ष पत्रकार राहुल सिंह ने कार्यों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जिस समर्पण और ईमानदारी के साथ मूकनायक पत्रिका में कार्य कर रहे हैं, वह युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। पत्रकारिता केवल खबरें लिखने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का सशक्त हथियार है, और मूकनायक की टीम इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही है।

उन्होंने मूकनायक पत्रिका से जुड़े सभी पत्रकारों, संपादकों और सहयोगियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आप सभी बाबा साहब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का जो कार्य कर रहे हैं, वह इतिहास में याद रखा जाएगा। समाज को जागरूक करना, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना और सच को सामने लाना ही सच्ची पत्रकारिता है।

और अंत में उन्होंने सराहना की और इसे भविष्य में और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह मुलाकात न केवल एक औपचारिक भेंट तक सीमित रही, बल्कि सामाजिक सरोकारों और पत्रकारिता की जिम्मेदारियों पर एक सार्थक संवाद का माध्यम भी बनी।

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