Thursday, February 26, 2026
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फूले निःशुल्क पाठशाला (जैतखाम) में माता रमाई की जयंती उत्साहपूर्वक संपन्न

फूले निःशुल्क पाठशाला (जैतखाम) में माता रमाई की जयंती उत्साहपूर्वक संपन्न

मूकनायक
कमलेश लवहात्रै छत्तीसगढ़ प्रभारी

बिलासपुर छत्तीसगढ़

फूले निःशुल्क पाठशाला (जैतखाम) में माता रमाई आंबेडकर की जयंती अत्यंत सम्मान, श्रद्धा एवं उत्साह के वातावरण में मनाई गई।
कार्यक्रम में पाठशाला के अध्यापक आयुष्मान लोकेश उके
के साथ विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर सहभाग लिया और माता रमाई के विचारों व आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर समाजसेवी अरुणा नागवंशी ताई विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने बच्चों के लिए आहार की व्यवस्था की, जिससे विद्यार्थियों में आनंद और आत्मीयता का वातावरण देखने को मिला। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने बच्चों का उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाया।
अपने प्रेरणादायी संबोधन में अरुणा नागवंशी ताई ने माता रमाई के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके त्याग, संघर्ष और सामाजिक समर्पण का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि माता रमाई का जन्म 7 फरवरी 1898 को हुआ था। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया और जीवनभर संघर्ष करती रहीं। अपने चार संतानों—गंगाधर, रमेश, राजरत्न और इंदु—को असमय खोने का असहनीय दुःख उन्होंने अदम्य साहस और धैर्य के साथ सहन किया। माता रमाई ने केवल अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को अपना परिवार मानकर जीवन जिया।
अरुणा नागवंशी ताई ने बताया कि माता रमाई ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के हर संघर्ष में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग किया। उनके इसी त्याग और योगदान के सम्मान में बाबासाहेब आंबेडकर ने अपनी महत्वपूर्ण पुस्तक “The Partition of India” माता रमाई को समर्पित की।
शिक्षा के महत्व पर बोलते हुए ताई ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि स्वाभिमान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जागरूकता का आधार है। शिक्षा से ही व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने माता रमाई के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा शिक्षा के माध्यम से स्वाभिमान और सकारात्मक वातावरण निर्माण का संकल्प लिया।
फूले निःशुल्क पाठशाला की ओर से अरुणा नागवंशी ताई का आभार व्यक्त किया गया। यह आयोजन केवल जयंती समारोह न होकर बच्चों में बहुजन महापुरुषों के प्रति सम्मान, प्रेरणा और सामाजिक चेतना जागृत करने वाला रहा।

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