Thursday, February 26, 2026
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नन्हे योद्धा बुद्धांश बागड़े “बौद्ध” ने रचा साहस और सफलता का स्वर्णिम अध्याय

गंभीर नेत्र रोग, आर्थिक संघर्ष और लगातार ऑपरेशनों के बीच अडिग हौसले से नवोदय परीक्षा व जिला स्तरीय प्रतियोगिता में शानदार सफलता

मूकनायक/ सत्यशील गोंडाने बालाघाट

वारासिवनी (बालाघाट)।
कहते हैं, जब इरादे बुलंद हों तो कठिन से कठिन राह भी मंज़िल तक पहुँचा देती है। वारासिवनी के एक नन्हे बालक ने इस कथन को सच साबित कर दिखाया है। जीवन की शुरुआत से ही गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने वाले छात्र बुद्धांश बागड़े “बौद्ध” ने अपने अदम्य साहस, अथक परिश्रम और अटूट आत्मविश्वास के बल पर ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो हर किसी को प्रेरित कर रही है।

बुद्धांश ने न केवल Jawahar Navodaya Vidyalaya प्रवेश परीक्षा सफलता पूर्वक उत्तीर्ण की, बल्कि जिला स्तरीय जनरल नॉलेज प्रतियोगिता में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर उच्च स्थान प्राप्त किया। उनकी इस उपलब्धि ने विद्यालय, परिवार और पूरे क्षेत्र का नाम गौरवान्वित कर दिया है।

पाँच वर्ष की आयु में गंभीर बीमारी से जंग-

मात्र पाँच वर्ष की आयु में बुद्धांश एक गंभीर नेत्र रोग Keratoconus से ग्रसित हो गए। इस बीमारी ने उनकी दृष्टि पर गहरा प्रभाव डाला। पढ़ाई में बाधाएँ आईं, जीवन सामान्य बच्चों की तरह सरल नहीं रहा।

आर्थिक परिस्थितियाँ भी बेहद चुनौतीपूर्ण थीं। लाखों रुपये के उपचार और लगातार ऑपरेशनों की आवश्यकता ने परिवार को कठिन दौर से गुजारा। परंतु माता-पिता ने हिम्मत नहीं हारी। रिश्तेदारों, शुभचिंतकों और समाज के सहयोग से उपचार की व्यवस्था की गई।

लंबे इलाज, ऑपरेशन की पीड़ा और बार-बार अस्पताल के चक्कर—इन सबके बीच भी बुद्धांश ने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया।

बीमारी के बीच भी पढ़ाई से नहीं टूटा रिश्ता-

स्वास्थ्य समस्याओं के कारण पढ़ाई पर बार-बार असर पड़ा, लेकिन बुद्धांश का संकल्प अडिग रहा। उन्होंने स्वयं को परिस्थितियों के हवाले नहीं किया, बल्कि संघर्ष को अपनी ताकत बना लिया।

इसी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम रहा कि उन्होंने नवोदय प्रवेश परीक्षा में सफलता प्राप्त की। यह उपलब्धि अपने आप में असाधारण है, क्योंकि इस परीक्षा को देश की प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में से एक माना जाता है।

नवोदय परीक्षा में सफलता के बाद उनकी दूसरी आँख का भी बड़ा ऑपरेशन हुआ। उपचार और अध्ययन के बीच संतुलन बनाना किसी वयस्क के लिए भी कठिन होता है, लेकिन इस नन्हे योद्धा ने यह कर दिखाया।

जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भी परचम-

सिर्फ नवोदय तक सीमित न रहकर बुद्धांश ने जिला स्तरीय जनरल नॉलेज प्रतियोगिता में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

वर्तमान में वे कक्षा 7वीं “ब” में अध्ययनरत हैं और निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर हैं।

उनकी माता अन्नपूर्णा बागड़े “बौद्ध” एवं पिता जीतू सी. एन. बौद्ध (समाज सेवक, सामाजिक विश्लेषक एवं बौद्धाचार्य) अपने पुत्र की उपलब्धियों पर गर्व महसूस कर रहे हैं। परिवार ने इस सफलता का श्रेय बालक के धैर्य, शिक्षकों के मार्गदर्शन और समाज से मिले सहयोग को दिया है।

प्रेरणा की जीवंत मिसाल

बुद्धांश की संघर्षगाथा यह सिखाती है कि-

बीमारी बाधा हो सकती है, पर हार का कारण नहीं

आर्थिक कठिनाई रुकावट हो सकती है, पर सपनों का अंत नहीं

परिस्थितियाँ कठोर हों, तो भी संकल्प उससे अधिक मजबूत होना चाहिए

आज बुद्धांश बागड़े “बौद्ध” केवल एक सफल छात्र नहीं, बल्कि साहस, धैर्य और आत्मविश्वास की जीवंत मिसाल बन चुके हैं।

उनकी कहानी यह संदेश देती है कि
“संघर्ष जितना बड़ा, सफलता उतनी ही प्रेरणादायी।”

यह नन्हा योद्धा आने वाले समय में और भी ऊँचाइयाँ छुए, यही पूरे क्षेत्र की शुभकामना है।

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