Thursday, February 26, 2026
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धम्मपद वाणी

हंसादिच्चपथे यन्ति, आकासे यन्ति इद्धिया।
नीयन्ति धीरा लोकम्हा, जेत्वा मांर सवाहिनिं।।

हंस सूर्य- पथ (आकाश) में जाते हैं, (कोई)ऋद्धि -बल से आकाश में जाते हैं।
पंडित लोग सेना सहित मार को जीत कर (इस) लोक से (निर्वाण को) ले जाये जाते हैं। अर्थात, निर्वाण प्राप्त कर लेते हैं। )
साधु, साधु , साधु
भवतु सब्बं मगलं
बौद्धाचार्य पूरणमल बौद्ध प्रदेश अध्यक्ष दि बुद्धिष्ट सोसायटी आफ़ इंडिया (भारतीय बौद्ध महासभा राजस्थान (दक्षिण)

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