दि बुद्धिष्ट प्रचारक विंग छत्तीसगढ़ की एक दिवसीय वैचारिक धम्म संगोष्ठी दमोह में संपन्न
मूकनायक
कमलेश लवहात्रै छत्तीसगढ़ प्रभारी
दमोह
दि बुद्धिष्ट प्रचारक विंग छत्तीसगढ़ द्वारा धम्म प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से मध्यप्रदेश के दमोह स्थित प्रज्ञा दीप बुद्ध विहार में एक दिवसीय वैचारिक धम्म संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन आयु बारमाटे , स्वेजा ऊके, गीता रामटेके एवं बुद्ध विहार महिला समिति के सहयोग से सम्पन्न हुआ। विंग द्वारा सभी आयोजकों एवं बुद्ध विहार समिति के प्रति साधुवाद एवं आभार व्यक्त किया गया।
संगोष्ठी की शुरुआत त्रिशरण एवं पंचशील के वाचन से हुई। इसके पश्चात ज्योति बौद्ध ने भारतीय संविधान की उद्देशिका का वाचन कर समसामयिक प्रश्न उपस्थित किए। सही उत्तर देने वाले प्रतिभागियों को पेन प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।
संगोष्ठी का मुख्य विषय था —
“21वीं सदी में सावित्रीबाई फुले और माता रमाई होतीं तो कैसी होतीं”। इस विषय पर उपस्थित उपासक-उपासिकाओं ने अपने विचार रखे। सविता बौद्ध ‘संकल्पी’ ने विषय पर विस्तारपूर्वक चिंतन प्रस्तुत किया। जयश्री बौद्ध जी ने उदाहरण सहित समझाया कि बौद्ध समाज को किन कुरीतियों और आचरणों से बचना चाहिए।
अलका बौद्ध ने महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन की विस्तृत जानकारी दी तथा वर्तमान में आकाश लामा के नेतृत्व में ऑल इंडिया बुद्धिस्ट फोरम द्वारा बोधगया में चलाए जा रहे आंदोलन में सहभागिता की अपील की। उन्होंने “बौद्ध बनो, बौद्ध लिखो, बौद्ध दिखो” के संदेश के साथ समाज निर्माण का आह्वान किया।
ज्योति बौद्ध जी ने “बौद्धों को क्या करना चाहिए” विषय पर मार्गदर्शन दिया। सुलोचना बौद्ध जी ने गर्भमंगल संस्कार पर अपने अनुभव साझा किए और गीत के माध्यम से प्रेरक संदेश दिया।
मुख्य प्रबोधन सविता बौद्ध ‘संकल्पी’ द्वारा किया गया, जिसमें उन्होंने 22 प्रतिज्ञाओं, बौद्ध संस्कारों एवं बौद्ध पर्वों पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा अपने स्वलिखित गीत के माध्यम से चिंतन प्रस्तुत किया। जयश्री बौद्ध जी द्वारा उपस्थित उपासक-उपासिकाओं को 22 प्रतिज्ञाएं दिलाई गईं।
कार्यक्रम के दौरान विंग द्वारा “बुद्ध के समकालीन भिक्षु” पुस्तक एवं वर्ष 2026 का कैलेंडर बुद्ध विहार समिति एवं सभी उपस्थितजनों को सप्रेम भेंट किया गया। अंत में मंगल मैत्री के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ तथा आशा ताई द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।
संगोष्ठी में उपस्थित समस्त बुद्ध-आंबेडकर अनुयायियों एवं बच्चों को साधुवाद प्रेषित किया गया।





