Thursday, February 26, 2026
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त्यागमूर्ति माता रमाबाई के बिना अधूरा होता बाबा साहेब का संघर्ष

दमोह में श्रद्धा और गौरव के साथ मनाई गई माता रमाबाई अंबेडकर की 129वीं जयंती

दमोह (बालाघाट)।दमोह स्थित प्रज्ञादीप बुद्ध विहार में माता रमाबाई अंबेडकर की 129वीं जयंती श्रद्धा, सम्मान और सामाजिक चेतना के वातावरण में मनाई गई। रमाताई अंबेडकर महिला मंडल एवं डॉ. अंबेडकर मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों की उल्लेखनीय उपस्थिति देखने को मिली, जिसने माता रमाबाई के प्रति जनसमुदाय की गहरी आस्था को अभिव्यक्त किया।

त्रिशरण–पंचशील और सामूहिक दान से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ पूज्य भंते बोधि धम्म के सानिध्य में बुद्ध वंदना, त्रिशरण एवं पंचशील ग्रहण के साथ हुआ। इस अवसर पर महिला मंडल द्वारा भंते बोधि धम्म को सामूहिक दान अर्पित किया गया।
सेवाभाव की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत करते हुए आयुष्मान युवराज बारमाटे (मलाजखंड) ने अपनी पुत्री के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में बुद्ध विहार प्रबंधन समिति को एक हजार रुपये की दान राशि भेंट की।

अतिथियों के प्रेरक उद्बोधन: त्याग की प्रतिमूर्ति थीं रमाबाई

मुख्य अतिथि आयुष्मान अशोक नागदेवे (प्रशिक्षण अधिकारी, आईटीआई कांडाटोला) ने अपने भावपूर्ण उद्बोधन में माता रमाबाई के जीवन संघर्ष और त्याग का उल्लेख करते हुए कहा कि माता रमाबाई ने अपने चार बच्चों के वियोग को सहते हुए भी समाज के करोड़ों बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का मार्ग प्रशस्त किया।
उन्होंने कहा कि जब बाबा साहेब विदेश में अध्ययनरत थे, तब माता रमाबाई ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में गोबर के उपले बेचकर गृहस्थी चलाई, लेकिन कभी भी बाबा साहेब की शिक्षा में बाधा नहीं आने दी। उनका त्याग ही बाबा साहेब की असली शक्ति था।

विशिष्ट अतिथि आयुष्मान युवराज बारमाटे ने कहा कि आज की शिक्षित महिलाओं को माता रमाबाई के धैर्य, त्याग और संकल्प से प्रेरणा लेकर सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।

भंते बोधि धम्म का संदेश: करुणा और प्रज्ञा का मार्ग

पूज्य भंते बोधि धम्म ने अपने आशीर्वचन में कहा कि माता रमाबाई का जीवन बौद्ध धम्म के शील, करुणा और त्याग का जीवंत उदाहरण है। उनके योगदान के बिना आधुनिक सामाजिक परिवर्तन की कल्पना संभव नहीं है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पांडूलाल रामटेके एवं ममता भौतेकर ने की, जिन्होंने समाज की एकता और संगठन पर विशेष बल दिया।

गीत, कविता और प्रसंगों से गूंजी त्याग की गाथा

कार्यक्रम में वंदना भेलावे, स्वेजा उके, ममता भौतेकर, संगीता उके, सुखचैन सत्यटेके एवं तेजलाल उके ने गीत, कविता और प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से माता रमाबाई के त्यागमय जीवन को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया।
मंच संचालन करते हुए आयुष्मान एस.आर. उके ने माता रमाबाई के जीवन परिचय पर प्रकाश डालते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया।

समापन पर गूंजे नारे

कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष ममता भौतेकर ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित उपासक-उपासिकाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। समापन अवसर पर “माता रमाबाई अमर रहें” के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

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