मूकनायक/ दुर्गेंद्र सम्राट ब्यूरो प्रभारी बस्ती/ उत्तर प्रदेश
बस्ती। जनपद मुख्यालय स्थित अनुसूचित जाति/ जनजाति (बालिका) छात्रावास की छात्राओं ने महिला महाविद्यालय की प्राचार्य पर जातिगत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संबंध में छात्राओं ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
छात्राओं का कहना है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित अंबेडकर छात्रावास महिला महाविद्यालय परिसर में स्थित है। यहां रहने वाली छात्राएं अपने परिवार से दूर रहकर पढ़ाई कर रही हैं। उनका आरोप है कि महाविद्यालय की वर्तमान प्राचार्य डॉ. सुनीता तिवारी के कार्यभार संभालने के बाद से अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की छात्राओं के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है।
शिकायत पत्र में कहा गया है कि छात्राओं की पढ़ाई में अनावश्यक हस्तक्षेप किया जाता है और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। आरोप है कि परिसर में लगे वाटर कूलर से स्वच्छ पेयजल लेने पर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती हैं। छात्राओं का दावा है कि पानी लेने पर उन्हें जातिसूचक शब्द कहे जाते हैं, जिससे वे आहत और असुरक्षित महसूस करती हैं।
छात्राओं का आरोप है कि उन्हें बदनाम करने और भविष्य खराब करने की धमकी दी जा रही है, जिससे वे भय और तनाव में हैं। उनका कहना है कि वे अपने परिवार से दूर रहकर पढ़ाई कर रही हैं और इस तरह की धमकियों से उनका मनोबल टूट रहा है।
छात्राओं ने यह भी उल्लेख किया है कि वर्ष 2022 में भी इसी प्रकार की शिकायत तत्कालीन जिलाधिकारी से की गई थी। उस समय प्राचार्य की ओर से भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न होने का आश्वासन दिया गया था लेकिन कथित रूप से स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
ज्ञापन में छात्राओं ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और छात्रावास में सुरक्षित व सम्मानजनक माहौल सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि छात्राओं को निर्भय होकर पढ़ाई करने का वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
इस संबंध में महाविद्यालय प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है। प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आ सकेगी। फिलहाल छात्राओं की शिकायत ने जिले में शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा और समानता के मुद्दे को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

