मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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भाग्य भी उन्हीं का साथ देता है जो पसीना बहाना जानते हैं”—यह केवल एक कहावत नहीं, बल्कि जीवन का एक शाश्वत सत्य है। अक्सर हम सफल लोगों को देखकर कह देते हैं कि वे ‘भाग्यशाली’ हैं, लेकिन उस भाग्य के पीछे छिपे घंटों के कठिन परिश्रम और बहाए गए पसीने को नजरअंदाज कर देते हैं। जब कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य के लिए पूरी निष्ठा से मेहनत करता है, तो परिस्थितियाँ अपने आप उसके अनुकूल होने लगती हैं। बिना कर्म के भाग्य का कोई अस्तित्व नहीं है। भाग्य असल में वह क्षण है जहाँ ‘तैयारी’ और ‘अवसर’ का मिलन होता है। जो व्यक्ति पसीना बहाकर खुद को तैयार रखता है, वही अवसर आने पर उसका लाभ उठा पाता है।
मेहनत का कोई विकल्प नहीं है और यही भाग्य को आकर्षित करने का सबसे बड़ा चुंबकीय गुण है। बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले और अन्य महापुरुषों ने पहले अपनी रातों की नींद और दिन का चैन त्यागा, तब जाकर भाग्य ने उनका साथ दिया । भाग्य कोई पका-पकाया फल नहीं है जो आसमान से गिरेगा, बल्कि यह वह फसल है जिसे कठिन परिश्रम की जमीन पर पसीने से सींचकर उगाया जाता है। यदि आप चाहते हैं कि सितारे आपके पक्ष में हों, तो पहले आपको जमीन पर पसीना बहाना सीखना होगा।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

