मूकनायक/इंद्रसेन गौतम ब्लॉक रिपोर्टर बस्ती/उत्तर प्रदेश
बस्ती। विकासखंड सल्टौआ गोपालपुर की ग्राम पंचायत जोगिया जूड़ी कुइयां में मनरेगा योजना के तहत एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सरकार द्वारा पारदर्शिता के उद्देश्य से लागू किया गया Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (मनरेगा) और इसके तहत अनिवार्य National Mobile Monitoring System (NMMS) ऐप अब कथित तौर पर फर्जीवाड़े का जरिया बनता दिख रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पोर्टल पर कई दिनों से एक ही पुरानी फोटो को बार-बार अपलोड कर मजदूरों की हाजिरी लगाई जा रही है। कागजों और मस्टरोल में मजदूर काम करते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में मौके पर सन्नाटा पसरा मिला।
पुरानी फोटो से नई हाजिरी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि पात्र मजदूरों को काम नहीं दिया जा रहा, जबकि कागजी श्रमिकों के नाम पर भुगतान निकाला जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि NMMS ऐप लाइव लोकेशन और समय के साथ फोटो अपलोड करता है, तो एक ही फोटो बार-बार सिस्टम पर कैसे स्वीकार हो रही है?
अधिकारी पर टालमटोल का आरोप
मामले की शिकायत खंड विकास अधिकारी (BDO) से की गई। आरोप है कि उन्होंने गंभीरता से जांच का आश्वासन देने के बजाय “देख लेंगे” कहकर बात समाप्त कर दी। इससे विभागीय स्तर पर मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।
ग्राम सचिव ने रोजगार सेवक का संपर्क दिया। रोजगार सेवक ने दावा किया कि “काम चल रहा है”, लेकिन जब मीडिया टीम मौके पर पहुँची तो कोई कार्य होता नहीं मिला। बाद में सफाई दी गई कि “जो फोटो NMMS पर दिख रही है, वह किसी अन्य स्थान की है।”
अब बड़ा सवाल यह है की
- यदि हाजिरी रोजगार सेवक की आईडी से लग रही है, तो लोकेशन अलग कैसे बताई जा रही है?
- NMMS पोर्टल पर एक ही फोटो बार-बार कैसे स्वीकार हो रही है?
- मस्टरोल में दर्ज मजदूर वास्तव में कार्यस्थल पर मौजूद थे या नहीं?
- शिकायत के बाद भी स्थलीय निरीक्षण क्यों नहीं हुआ?
- क्या ग्राम प्रधान और रोजगार सेवक की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है?
अब देखना यह है कि प्रशासन इस कथित ‘डिजिटल डकैती’ पर कब तक कार्रवाई करता है या यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

