
मूकनायक समाचार/सत्यशील गोंडाने (बालाघाट)
बालाघाट। जनपद पंचायत वारासिवनी अंतर्गत ग्राम पंचायत मेहंदीवाड़ा में वित्तीय अनियमितताओं और पंचायत कोष के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। इस संबंध में उप सरपंच – रंजीत बागडे एवं ग्रामीण ने जिला पंचायत बालाघाट के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) को लिखित शिकायत सौंपकर उच्च स्तरीय जांच एवं दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत में सरपंच एवं सचिव द्वारा विभिन्न योजनाओं और मदों में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं। आवेदन में फर्जी बिल, मनरेगा कार्यों में गड़बड़ी तथा पंचायत निधि के दुरुपयोग जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन अनियमितताओं के कारण शासन की योजनाओं का लाभ आम ग्रामीणों तक सही ढंग से नहीं पहुंच पा रहा है।
आवेदन में यह भी बताया गया है कि इस संबंध में पूर्व में जनपद पंचायत वारासिवनी के CEO को लिखित शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक किसी प्रकार की प्रभावी जांच या कार्रवाई नहीं की गई। इसी कारण मामले को जिला स्तर पर उठाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।
ग्राम पंचायत में विकास कार्यों और वित्तीय लेनदेन को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार मनरेगा कार्यों से लेकर ग्राम कोष और नल-जल योजना तक कई मामलों में पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
मनरेगा कार्यों में गड़बड़ी का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि शिवनाथ के खेत तालाब निर्माण कार्य में मौके पर लगभग 6 मजदूर ही कार्यरत पाए गए, जबकि मस्टर रोल में 15 से अधिक मजदूरों के नाम दर्ज हैं। इससे फर्जी हाजिरी और भुगतान की आशंका जताई जा रही है। साथ ही मनरेगा एवं 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत हुए कार्यों की मजदूरी का भुगतान लगभग एक वर्ष से लंबित बताया जा रहा है, जिससे मजदूरों में नाराजगी है।
ग्राम कोष राशि के दुरुपयोग की आशंका
ग्राम कोष से विभिन्न मदों में खर्च दर्शाया गया है, किंतु कई मामलों में पारदर्शिता और सत्यापन संदिग्ध बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने नकद भुगतान की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पंचायत को सभी भुगतान बैंकिंग माध्यम से और सार्वजनिक जानकारी के साथ करने चाहिए।
नल-जल योजना में भी गड़बड़ी
नवीन नल-जल योजना का विधिवत हैंडओवर किए बिना ही वसूली किए जाने की शिकायत सामने आई है। साथ ही यह भी आरोप है कि वसूली गई राशि का पूर्ण रूप से पंचायत कोष में जमा न होना संदेह पैदा करता है। ग्रामीणों ने इसकी जांच की मांग की है।
हाट-बाजार एवं गोसाई कॉम्प्लेक्स किराया अनियमितता
हाट-बाजार कॉम्प्लेक्स (10 दुकान) तथा गोसाई कॉम्प्लेक्स (8 दुकान) से प्राप्त किराया राशि का पंचायत कोष में नियमित और पूर्ण रूप से जमा न होना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किराया समय पर वसूल हो रहा है तो उसका लेखा-जोखा सार्वजनिक होना चाहिए।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो पंचायत में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा और विकास कार्य प्रभावित होंगे। उन्होंने जिला प्रशासन से पारदर्शी जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कदम उठाने की अपील की है।
अब देखना यह होगा कि जिला पंचायत प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या रुख अपनाता है और जांच की प्रक्रिया कब तक प्रारंभ होती है।
वहीं पंचायत प्रतिनिधियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, परंतु समाचार लिखे जाने तक उनका आधिकारिक बयान प्राप्त नहीं हो सका।
यदि संबंधित पक्ष अपना स्पष्टीकरण देना चाहें तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

