ग्रामीण में रोजगार पर सियासत तेज: ‘वीबी जी राम जी योजना’ बनाम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम
मूकनायक
कमलेश लवहात्रै छत्तीसगढ़ प्रभारी
बिलासपुर छत्तीसगढ़
क्षेत्र में रोजगार और मजदूरी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा के ग्रामीण अध्यक्ष मुशर्रफ़ खान ने दावा किया है कि “वीबी जी राम जी योजना” ने मनरेगा से आगे बढ़ते हुए ग्रामीण मजदूरों को अधिक लाभ पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि योजना के बेहतर प्रावधानों के कारण विपक्ष, विशेषकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, असहज दिखाई दे रही है।
////100 दिन बनाम 125 दिन रोजगार का दावा////
मुशर्रफ़ खान के अनुसार जहां मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाता है, वहीं “वीबी जी राम जी योजना” में जॉब कार्डधारी मजदूरों को 125 दिन का रोजगार देने का प्रावधान है। उनका कहना है कि अतिरिक्त 25 दिन का रोजगार सीधे तौर पर मजदूरों की आय बढ़ाएगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा।
////मजदूरी दर में वृद्धि का दावा////
उन्होंने बताया कि योजना में मजदूरी दर में भी बढ़ोतरी की गई है, ताकि महंगाई के दौर में श्रमिकों को वास्तविक लाभ मिल सके। बढ़ी हुई मजदूरी से ग्रामीण परिवारों का जीवन स्तर सुधरेगा और उन्हें बुनियादी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उनका दावा है कि इससे पलायन की समस्या में भी कमी आएगी।
///केंद्र सरकार की नीतियों की सराहना////
मुशर्रफ़ खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि श्रमिकों और वंचित वर्गों के हित में लगातार फैसले लिए जा रहे हैं। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और रोजगार सृजन की पहल को उन्होंने जनहितकारी बताया।
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब कोई योजना जमीनी स्तर पर सफल होती है और मजदूरों को वास्तविक लाभ मिलता है, तो विपक्ष की असहजता स्वाभाविक है। अध्यक्ष का कहना है कि मनरेगा के नाम पर राजनीति करने वालों को अब जवाब मिल रहा है।
जनहित के नजरिए से, रोजगार के बढ़ते अवसर और मजदूरी में संभावित वृद्धि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अहम माने जा रहे हैं। वहीं राजनीतिक परिवेश में इस मुद्दे ने सत्ता और विपक्ष के बीच नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन दावों पर प्रशासनिक स्तर पर क्या तथ्य सामने आते हैं और इसका वास्तविक लाभ ग्रामीण मजदूरों तक किस हद तक पहुंचता है।


