करुणामई रमा आई अम्बेडकर की जयंती बौद्ध समाज द्वारा श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाई गई
मूकनायक
कमलेश लवहात्रै छत्तीसगढ़ प्रभारी
भिलाई छत्तीसगढ़
त्याग, समर्पण, सेवा और नारी चेतना की जीवंत प्रतिमूर्ति तथा भारतीय संविधान के शिल्पकार भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की जीवन संगिनी करुणामई रमा आई अम्बेडकर की जयंती बौद्ध समाज द्वारा श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। यह गरिमामय आयोजन सेक्टर–6, भिलाई स्थित बुद्ध विहार में महाबोधी महाविहार मुक्ति आंदोलन महिला प्रकोष्ठ के तत्वावधान में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों में मुख्य अतिथि नरेंद्र मेश्राम (गोंदिया, महाराष्ट्र), संदीप कोल्हटकर (राजनांदगांव), डॉ. अरविंद चौधरी (दुर्ग), सुशील गणवीर (गोंदिया), सविता बौद्ध ‘संकल्पी’ (दुर्ग) एवं वर्षा बागड़े (भिलाई) शामिल रहे।
कार्यक्रम की प्रस्तावना अल्का बौद्ध ने रखी, अध्यक्षता डॉ. सरोज बौद्ध ने की, जबकि मंच संचालन का दायित्व जयश्री बौद्ध एवं ज्योति बौद्ध ने कुशलता से निभाया।
कार्यक्रम की शुरुआत नन्हें भीम सैनिक यथार्थ सम्राट भारतीय के ओजस्वी भाषण से हुई। उन्होंने रमा आई अम्बेडकर के संघर्षपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के तीन महान गुरुओं—तथागत बुद्ध, संत कबीर एवं महामना ज्योतिबा फुले—के क्रांतिकारी विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
डॉ. अरविंद चौधरी ने समाज में संगठन की आवश्यकता पर बल देते हुए रमा आई के अद्वितीय समर्पण भाव को स्मरण कराया। सुशील गणवीर ने रमा आई के जीवन पर भावपूर्ण और मार्मिक उद्बोधन दिया। मुख्य अतिथि नरेंद्र मेश्राम ने रमा अम्बेडकर के सेवा-त्याग को नमन करते हुए देश की सामाजिक एवं राजनीतिक दशा-दिशा पर विचार रखे तथा यूजीसी के समर्थन में अपनी बात रखी। वहीं अक्षिता ने रमा आई के जीवन पर सारगर्भित भाषण प्रस्तुत किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में मंगला गेडाम, प्रणाली, संगीता, नीतू, सुलोचना बौद्ध, केसर रामटेके एवं राजू मेश्राम ने अपने गीतों की मनोहारी प्रस्तुतियाँ दीं। सविता बौद्ध ‘संकल्पी’ के मिशनरी गीतों का समूहगान समाज को सदैव जागरूक और संगठित रहने का संदेश देता रहा।
इस अवसर पर दि बुद्धिस्ट प्रचारक विंग छत्तीसगढ़ की संस्थापिका सविता बौद्ध संकल्पी द्वारा तथा नवदृष्टि फाउंडेशन के सहयोग से बौद्ध समाज के 25 लोगों द्वारा मरणोपरांत देहदान एवं नेत्रदान की घोषणा करने वाले संकल्पित व्यक्तियों को सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में भूपत बोरकर, आशा जुल्मे, हर्षिला रंगारी, स्नेहा मेश्राम, विशाखा कुर्रे, रेशमा आनंद, विजया जमुरिया, सुनंदा गजभिए, अनिल जोग, सुदेश कुमार, वी.एन. राव, रवि गाडगे, शिवचरण पंतवाने, विनोद टेंभरे, एच.पी. नंदगावली, महेंद्र बौद्ध, यशवंत रामटेके, सुभाष बंसोडकर, महेंद्र रामटेके सहित बड़ी संख्या में बौद्ध समाज के गणमान्यजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन करुणामई रमा आई अम्बेडकर के आदर्शों को आत्मसात करने के संकल्प के साथ हुआ।




