मूकनायक/ इंद्रसेन गौतम ब्लॉक रिपोर्टर बस्ती/उत्तर प्रदेश
बस्ती। मन चंगा तो कठौती में गंगा’ का अमर संदेश देने वाले महान संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती एकता बौद्ध बिहार बढया द्वारा भव्य रूप से मनाई गई। इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कार्यक्रमों का आयोजन कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत गुरु रविदास जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर और दीप प्रज्वलित कर की गई। एकता बौद्ध विहार के पदाधिकारियों ने संबोधित करते हुए कहा कि गुरु रविदास जी ने समाज में व्याप्त भेदभाव, छुआछूत और ऊंच-नीच को मिटाकर मानवता और प्रेम का संदेश दिया था। उनके विचार आज के समय में और भी प्रासंगिक हैं।
भजन और कीर्तन: स्थानीय कलाकारों द्वारा गुरु के भजनों की प्रस्तुति दी गई।
विचार गोष्ठी: वक्ताओं ने गुरु रविदास के ‘बेगमपुरा’ (ऐसा शहर जहां कोई दुख न हो) की संकल्पना पर चर्चा की।
प्रसाद वितरण: कार्यक्रम के अंत में सामूहिक भोज और प्रसाद का वितरण किया गया, जिसमें हर वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया
एकता बौद्ध बिहार के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस बौद्ध विहार का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ना है। गुरु रविदास जी की जयंती हमें सिखाती है कि श्रम ही ईश्वर है और सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
रविदास जन्म के कारनै, होत न कोई नीच।
नर को नीच करि डारि है, ओछे करम की कीच।।”
इस अवसर पर धर्मेंद्र अकेला, पंचम गौतम, आशीष अंबेडकर, दीपक, और तमाम एकता बौद्ध विहार के दर्जनों कार्यकर्ता और सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहें।

