मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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इंसान कभी अपनी मर्जी से नहीं बदलता, बल्कि सामने वाला उसे बदलने पर मजबूर कर देता है”, जो मानवीय व्यवहार और रिश्तों की एक गहरी सच्चाई को दर्शाता है। व्यवहार में बदलाव अक्सर बाहरी परिस्थितियों, विश्वासघात या अपनों के व्यवहार के कारण होता है, जो किसी व्यक्ति को सुरक्षा, आत्म-सम्मान या प्रेम के लिए बदलने हेतु बाध्य करते हैं। जब हम कहते हैं कि “सामने वाला मजबूर कर देता है,” तो इसका अर्थ अक्सर रिश्तों में आए कड़वे अनुभवों या अपेक्षाओं के टूटने से होता है। किसी का बार-बार किया गया अपमान, विश्वासघात या उपेक्षा व्यक्ति के भीतर के ‘धैर्य’ को खत्म कर देती है। ऐसी स्थिति में, व्यक्ति खुद को बचाने के लिए अपने व्यवहार, बातचीत के तरीके और यहाँ तक कि अपनी कोमलता को भी त्याग देता है।
यहां यह गौरतलब है कि समाज और रिश्तों का दबाव एक मूर्तिकार की छेनी की तरह काम करता है। जिस तरह पत्थर अपनी मर्जी से आकार नहीं बदलता, बल्कि छेनी की चोट उसे बदलने पर विवश करती है, ठीक उसी तरह इंसान भी तब बदलता है, जब उसके पास ‘पुराने’ बने रहने का विकल्प खत्म हो जाता है। अन्याय के विरुद्ध और अपने हक अधिकारों के लिए चुप्पी साधना वास्तव में खुद के विरुद्ध एक अपराध है। इसलिए अपनी जीवंतता को बचाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि व्यक्ति अपने अधिकारों के प्रति सजग रहे और अपने हक अधिकारों के लिए हर छोटे-बड़े अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करे।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

