जबरा पहाड़िया उर्फ तिलका मांझी (11 फरवरी 1750 – 13 जनवरी 1785)* एक महान आदिवासी नेता और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहले शहीद थे, जिन्होंने मंगल पांडे से भी पहले 1784 में अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह किया था। बिहार के सुल्तानगंज के तिलकपुर में जन्मे, जबरा पहाड़िया (मूल नाम) ने गोरिल्ला युद्ध से अंग्रेजों को हराया और 1784 में क्लीवलैंड को मार गिराया था।
तिलका मांझी का
जन्म और बचपन: इनका जन्म 11 फरवरी 1750 को बिहार के सुल्तानगंज के तिलकपुर गाँव में एक संथाल परिवार में हुआ था. इनका वास्तविक नाम जबरा पहाड़िया था.
व्यक्तित्व: वे एक निर्भीक और ओजस्वी नेता थे। तिलका (अर्थ: गुस्सैल/लाल आँख वाला) नाम अंग्रेजों द्वारा दिया गया था क्योंकि वे अंग्रेजों के दमनकारी नीतियों के विरुद्ध थे.
अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह: उन्होंने 1784 में भागलपुर के कलेक्टर ऑगस्टस क्लीवलैंड को अपने तीरों से मार गिराया. उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ गोरिल्ला युद्ध (छापामार युद्ध) का नेतृत्व किया।
उन्हें अंग्रेजों ने धोखे से पकड़कर 13 जनवरी 1785 को भागलपुर में एक बरगद के पेड़ से लटकाकर फांसी दे दी थी। वो देश के लिए शहीद हो गए।
देश में उनके नाम विरासत में 1991 में बिहार सरकार ने भागलपुर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय कर दिया।
वे आदिवासी समुदायों के बीच एक ” रॉबिन हुड” की तरह पूजनीय हैं, जो अपनी ज़मीन और संस्कृति की रक्षा के लिए अंत तक लड़े और देश के लिए शहीद हो गए। ऐसे महापुरुष आदिवासी समुदाय में जन्मे जबरा पहाड़िया उर्फ तिलका मांझी को शत-शत नमन वंदन।
संकलन :-
🙏 ✍️ बौद्धाचार्य पूरणमल बौद्ध प्रदेश अध्यक्ष दि बुद्धिष्ट सोसायटी आफ़ इंडिया भारतीय बौद्ध महासभा राजस्थान दक्षिण

