मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अंधविश्वास अक्सर भय और असुरक्षा से उपजता है। जब इंसान अपनी समस्याओं का समाधान मेहनत के बजाय टोटकों, नक्षत्रों या किसी चमत्कार में खोजने लगता है, तो वह आलसी हो जाता है और यह मान लेता है कि उसका भाग्य किसी बाहरी शक्ति के हाथ में है, जिससे उसकी निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास समाप्त होने लगता है । इसके विपरीत, कर्म हमें सिखाता है कि हम अपने भाग्य के निर्माता स्वयं हैं। कर्म करने से ना केवल कौशल विकसित होता है, बल्कि व्यक्ति में अनुशासन और धैर्य भी आता है।
इसलिए अंधविश्वास से दूर रहना और कर्म को अपनाना ही जीवन में सफलता और खुशी का असली रहस्य है क्योंकि एक कर्मशील व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में घबराने के बजाय समाधान ढूंढता है, जो उसे वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर बनाता है । अंधविश्वास एक अंधेरी गुफा है जहाँ विकास रुक जाता है, जबकि कर्म वह प्रकाश है जो प्रगति के द्वार खोलता है। समाज की उन्नति तभी संभव है जब हम तर्क और पुरुषार्थ को प्राथमिकता दें।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

