डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का एक ऐसा क्षण, जिसने सामाजिक चेतना को नई दिशा दी।आज के दिन 1932, में दूसरी गोलमेज कॉन्फ्रेंस के बाद लंदन से मुंबई लौटने पर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का, फ्रेंचाइज़ी समिति के ब्रिटिश सदस्य और मौलाना शौकत अली के साथ, बॉलर पियर से बायकुला तक विशाल रैली के माध्यम से ऐतिहासिक स्वागत किया गया।
यह जनसमर्थन सामाजिक न्याय की चेतना का प्रतीक था।
29 जनवरी 1939 को डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने पुणे के गोखले इंस्टिट्यूट में फेडरेशन की निंदा करते हुए तीन घंटे का ऐतिहासिक भाषण दिया, जो बाद में “Federation Versus Freedom” के रूप में प्रकाशित हुआ।
यह केवल भाषण नहीं, स्वतंत्रता की वैचारिक लड़ाई थी।
संकलन=
✍️ बौद्धाचार्य पूरणमल बौद्ध

