Thursday, February 26, 2026
Homeहिमाचल प्रदेशहिमाचल की राजनीति में बड़ा विवाद,बाल आयोग में नियुक्ति पर सवालों का...

हिमाचल की राजनीति में बड़ा विवाद,बाल आयोग में नियुक्ति पर सवालों का तूफान, सुक्खू सरकार घेरे में

मूकनायक/सुषमा पुनटा

शिमला/हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में की गई एक नियुक्ति को लेकर प्रदेश सरकार, खासकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, विपक्ष और सामाजिक संगठनों के निशाने पर आ गए हैं।

मामला मोनिता चौहान की नियुक्ति से जुड़ा है, जिन्हें हाल ही में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य बनाया गया है। इस नियुक्ति के बाद सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि मोनिता चौहान के खिलाफ एक गंभीर आपराधिक मामला न्यायालय में लंबित है।

दो दस्तावेज़, एक बड़ा सवाल

पहला दस्तावेज़:
हिमाचल प्रदेश सरकार की अधिसूचना, जिसमें मोनिता चौहान की बाल आयोग में नियुक्ति दर्शाई गई है।

दूसरा दस्तावेज़:
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में लंबित मामला
Priti बनाम Monita Chauhan
क्रिमिनल अपील नंबर 466/2025

इस मामले में कोर्ट ने अपील को स्वीकार (Admit) करते हुए मोनिता चौहान को ₹50,000 के पर्सनल बॉन्ड पर राहत दी है और बिना अनुमति देश छोड़ने पर रोक लगाई है।

नियुक्ति पर उठे गंभीर सवाल

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि—
• क्या सरकार को नियुक्ति से पहले इस केस की जानकारी नहीं थी?
• अगर जानकारी थी, तो क्या लंबित आपराधिक मामले के बावजूद इतनी संवेदनशील संस्था में नियुक्ति उचित है?
• जिस व्यक्ति पर अत्याचार जैसे गंभीर आरोप हों, क्या वह बच्चों के अधिकारों की रक्षा का नैतिक दायित्व निभा सकता है?

बताया जा रहा है कि इस मामले में शिकायतकर्ता महिला न्याय की मांग को लेकर अदालत का दरवाज़ा खटखटा रही है, जबकि दूसरी ओर आरोपी को एक संवैधानिक पद सौंप दिया गया।

राजनीतिक दबाव और अंदरूनी खींचतान के आरोप

सूत्रों के अनुसार, इस नियुक्ति को लेकर सरकार के भीतर भी असहजता है। राजनीतिक सलाहकार सुनील बिट्टू की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं और यह चर्चा तेज है कि किस दबाव या सिफारिश के तहत यह नियुक्ति हुई।

जनता और विपक्ष का सवाल

विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि—
• या तो मोनिता चौहान स्वयं इस्तीफा दें
• या सरकार इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट जवाब दे

क्योंकि यह मामला केवल राजनीति का नहीं, बल्कि हिमाचल के बच्चों के भविष्य और संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा है।

नज़रें सरकार के अगले कदम पर

फिलहाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन मामला तूल पकड़ चुका है।
पूरा हिमाचल जवाब का इंतज़ार कर रहा है।

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments