Thursday, February 26, 2026
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हरिजन बस्ती की आरक्षित भूमि पर दबंगों का कब्जा, पीड़ितों ने एसडीएम से लगाई गुहार

मूकनायक/ दुर्गेंद्र सम्राट ब्यूरो प्रभारी बस्ती/ उत्तर प्रदेश

बस्ती। जनपद बस्ती तहसील सदर के एक गांव में हरिजन आबादी की भूमि पर अवैध अतिक्रमण का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में पीड़ित ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी सदर को लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हरिजन आबादी के लिए आरक्षित गाटा संख्या 147 और 301 पर दबंग किस्म के लोगों द्वारा जबरन कब्जा किया जा रहा है, जिससे दलित समुदाय के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार उक्त गाटा संख्या हरिजन आबादी के लिए सुरक्षित है जिस पर किसी अन्य व्यक्ति का कोई वैध अधिकार नहीं है इसके बावजूद गांव के वर्तमान ग्राम प्रधान उनके सहयोगी जो सवर्ण जाति से संबंधित बताए जा रहे हैं जबरन उक्त भूमि पर कब्जा कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि इस अवैध कब्जे की सूचना थाना वाल्टरगंज को भी दी गई थी पुलिस द्वारा मौके पर पहुंचकर संबंधित लोगों को कब्जा न करने की हिदायत दी गई लेकिन इसके बावजूद दबंगों ने पुलिस की बात नहीं मानी और दोबारा कब्जा करने का प्रयास शुरू कर दिया इससे हरिजन आबादी के लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।

पीड़ितों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो हरिजन आबादी की जमीन पूरी तरह से हड़प ली जाएगी, जिससे गरीब और भूमिहीन परिवारों के सामने गंभीर आवासीय संकट उत्पन्न हो जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम स्तर पर प्रभावशाली लोगों का दबदबा होने के कारण स्थानीय स्तर पर उनकी सुनवाई नहीं हो पा रही है।

इस मामले को लेकर अखिलेश, प्रिंस सिंघानिया, सुजीत, राजेश, अजय कुमार, राजेन्द्र प्रसाद और गुरूचरन सहित अन्य ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी से मांग की है कि अवैध कब्जा करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए तथा हरिजन आबादी की भूमि को पात्र व्यक्तियों को आवंटित कराया जाए। साथ ही भूमि की पैमाइश कर स्थायी रूप से कब्जा मुक्त कराने की भी मांग की गई है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि मौके पर राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम भेजकर स्थिति का जायजा लिया जाए ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार का विवाद न हो। इस संबंध में उपजिलाधिकारी कार्यालय से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन शिकायत के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच की संभावना जताई जा रही है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और क्या पीड़ित हरिजन परिवारों को उनका हक और न्याय मिल पाता है या नहीं।

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